त्रिवेणीगंज अस्पताल में मरीजो के जान से होता है खिलवाड़ 

बिना ब्लड लिए थमा दी गई जांच रिपोर्ट, फर्जी दवा वितरण का आरोप!

BIHAR SWATANTRA PRABHAT Picture
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पटना, बिहार ब्यूरो।

सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में लापरवाही और भ्रष्टाचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल पर मरीजों की जांच रिपोर्ट फर्जी तरीके से तैयार करने और दवाइयों के नाम पर कागजी खेल सामने आया है। 

जानकारी के अनुसार, नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड  6 निवासी 57 वर्षीय बाल्मीकि प्रसाद दास पिछले एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित थे। बुधवार को परिजन उन्हें इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे। ओपीडी में मौजूद चिकित्सकों ने मरीज का सीबीसी, हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, यूरिन आरई, एचबीएसएजी, ब्लड ग्रुप, ट्रूनेट, विडाल और डेंगू (IgM एवं IgG) जांच कराने का निर्देश दिया।

परिजन जब सरकारी लैब (कमरा संख्या 6) पहुंचे, तो लैब कर्मी ने समय की कमी का हवाला देते हुए जांच करने से मना कर दिया।  कहा कि “डेढ़ बज गए  है, अब जांच नहीं हो सकती।”  परिजन बिना जांच कराए घर लौट गए।

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लेकिन दो दिन बाद शुक्रवार हुआ उससेपरिजन के साथ आम अवाम   भौचक है। मरीज के पुत्र के मोबाइल पर बीआर जीओवीटी से एक मैसेज आया जिसमें लिखा था 
प्रिय बाल्मीकि प्रसाद दास, आपका लैब परीक्षण पूरा हो गया है। आपकी रिपोर्ट 31 अक्टूबर को जनरेट की जाएगी।
 परिजन शुक्रवार को अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें बिना किसी सैंपल लिए ही जांच रिपोर्ट थमा दी गई। रिपोर्ट देखकर परिजन हैरान रह गए। मरीज के पुत्र ने सवाल उठाया —

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जब मेरे पिता से ब्लड या किसी प्रकार का सैंपल लिया ही नहीं गया, तो रिपोर्ट बनी कैसे?
 परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में जांच और दवा वितरण के नाम पर घोटाला चल रहा है। मरीजों को बिना जांच किए फर्जी रिपोर्टें दी जा रही हैं और दवा केवल कागज पर लिखकर थमा दी जाती है।
 मरीज के परिजन ने  मामले की शिकायत एसडीओ  सह रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष अभिषेक कुमार और सिविल सर्जन से की गई है। परिजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है ताकि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खुलेआम खिलवाड़ पर रोक लग सके।
  इस संबंध में सुपौल सिविल सर्जन डॉ. ललन कुमार ठाकुर ने कहा कि मामला मेरे संज्ञान में आया है। हम स्वयं शनिवार को अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचकर जांच करेंगे।

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