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पाठकगंज गांव में मुर्गे की दुकान बनी ग्रामीणों के लिए सिरदर्द, मंदिर के पास फैलाई जा रही गंदगी और दुर्गंध
धार्मिक भावनाएं हो रही आहत, स्वास्थ्य संकट गहराया, ग्रामीणों ने दुकान हटाने की मांग की
मलिहाबाद। मलिहाबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पाठकगंज गांव में एक मुर्गे की दुकान ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। गांव के लोग लंबे समय से इस दुकान से उत्पन्न गंभीर दुर्गंध, गंदगी और सामाजिक असुविधा का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कसमंडी कला निवासी वसीक अहमद नामक व्यक्ति मंदिर से चंद कदमों की दूरी पर मुर्गे की दुकान चला रहा है। इससे मंदिर में पूजा-पाठ करने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। गांव के शाकाहारी परिवारों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान से फैलने वाली बदबू के चलते आसपास के घरों में रहना मुश्किल हो गया है। मुर्गे की कटाई से उत्पन्न खून और अवशेषों के कारण मक्खियों, कुत्तों और अन्य जानवरों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे संक्रमण और बीमारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या का तुरंत संज्ञान लें और उक्त दुकान को गांव से हटवाकर स्वच्छता और धार्मिक मर्यादा को बहाल करें।
गांव के निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाता है, तो वे प्रदर्शन और जनसुनवाई का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ दुर्गंध या असुविधा की बात नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं, स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। अब देखना यह है कि क्या थाना मलिहाबाद और जिला प्रशासन इस मामले में उचित कार्यवाही करेगा, या फिर ग्रामीणों की भावनाओं और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ जारी रहेगा।
अब सवाल ये उठते हैं
• क्या मंदिर के आसपास या फिर गांव के बीच इस प्रकार की मांस की दुकान को अनुमति देना उचित है?
• क्या स्वच्छ भारत अभियान का नारा केवल पोस्टरों तक सीमित है?
• क्या मलिहाबाद पुलिस ग्रामीणों की आवाज को गंभीरता से लेगी या फिर मूकदर्शक बनी रहेगी?
• क्यों अब तक दुकान के खिलाफ कोई निरीक्षण या नोटिस जारी नहीं किया गया है?

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