हरिनाहा में पंचायत भवन निर्माण पर आदिवासी समाज का विरोध, कहा – स्कूल की जमीन पर नहीं बनने देंगे भवन

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त्रिवेणीगंज: सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड अंतर्गत परसागढ़ी दक्षिण पंचायत के हरिनाहा वार्ड संख्या-9 में निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार को आदिवासी समाज समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर निर्माण स्थल पर जोरदार प्रदर्शन किया और कड़ी आपत्ति जताते हुए काम रुकवा दिया। शुक्रवार को भी निर्माण कार्य बाधित रहा।


ग्रामीणों का आरोप – यह स्कूल की जमीन है

ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर पंचायत भवन का निर्माण हो रहा है, वह आदिवासी आवासीय हाई स्कूल के नाम से दशकों से दर्ज है। प्रदर्शनकारियों ने ज़मीन से जुड़े दस्तावेज़ और मालगुजारी रसीदें दिखाते हुए कहा कि इस भूमि पर बच्चों का भविष्य टिका हुआ है, इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना गलत है। ग्रामीणों के अनुसार, परसागढ़ी मौजा अंतर्गत खाता संख्या 495 एवं खेसरा संख्या 2341 में कुल 5 एकड़ 14 डिसमिल भूमि दर्ज है, जो आदिवासी आवासीय हाई स्कूल, हरिनाहा के नाम पर है। वर्षों से इसकी मालगुजारी रसीद कट रही है, फिर भी बिना जांच-पड़ताल के पंचायत सरकार भवन का निर्माण शुरू कर दिया गया।

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एनओसी को लेकर सवाल

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ग्रामीणों ने भूमि उपयोग की अनुमति (एनओसी) पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आदिवासी संघ के अध्यक्ष राकेश कुज्जु ने कहा, "जब जमीन स्कूल के नाम से दर्ज है, तो बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर इस पर पंचायत भवन कैसे बनाया जा सकता है?"संघ के सदस्य चंद्रशेखर उरांव ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि एससी-एसटी छात्रों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ऐसी जमीनें स्कूलों के लिए चिन्हित की जाती हैं, लेकिन सरकार खुद ही इस नीति के विरुद्ध जा रही है।

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पुरानी स्कूल की नींव अब भी मौजूद

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ग्रामीणों ने बताया कि करीब दो दशक पहले तक इस भूमि पर एक आवासीय विद्यालय संचालित होता था। सरकारी उपेक्षा के चलते विद्यालय धीरे-धीरे बंद हो गया। लेकिन आज भी वहां विद्यालय की पुरानी नींव मौजूद है, जहां पहले फूस के घर में कक्षाएं लगती थीं।गौरतलब है कि 27 मार्च को ग्रामीणों ने एक बैठक कर विद्यालय पुनर्निर्माण हेतु एक कमिटी बनाई थी। बैठक में विद्यालय की जमीन की घेराबंदी कर अतिक्रमण से मुक्त कराने का प्रस्ताव भी पारित किया गया था।

हरिनाहा में पंचायत भवन निर्माण पर आदिवासी समाज का विरोध, कहा – स्कूल की जमीन पर नहीं बनने देंगे भवनजिलाधिकारी से जांच की मांग

आक्रोशित ग्रामीणों ने सुपौल के जिलाधिकारी और भूमि सुधार विभाग से मामले की अविलंब जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं मिला तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन में मंजूला उरांव, संजूला उरांव, प्रमिला देवी, उषा देवी, गीता देवी, अर्जुन पासवान, कमलेश्वरी उरांव, सूर्यनारायण उरांव, रंजन उरांव, अरविंद उरांव, मनोज उरांव, हीरालाल उरांव, दीपक साह, धीरेन्द्र उरांव, संतोष उरांव, विनोद उरांव, जनक लाल उरांव, रंजीत उरांव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।


जनप्रतिनिधियों की चिट्ठियां भी रहीं बेअसर

इस गंभीर मामले को लेकर क्षेत्र संख्या-25 की जिला परिषद सदस्य पूनम कुमारी ने 2023 में अररिया के सांसद प्रदीप कुमार सिंह को पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित कराया थासांसद ने भी तत्परता दिखाते हुए 8 अप्रैल 2023 को तत्कालीन केंद्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति मंत्री अर्जुन मुंडा को पत्र लिखकर इस भूमि पर एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के निर्माण की मांग रखी थी।हालांकि, यह पत्राचार अब तक ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है और वर्षों पुरानी शिक्षा परियोजना आज भी एक अधूरी कल्पना बनकर रह गई है।


प्रशासन की प्रतिक्रिया

मामले को लेकर एसडीएम शंभूनाथ ने कहा कि "यह मामला अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं आया है। यदि मामला सामने आता है तो निश्चित रूप से जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।"वहीं, परसागढ़ी दक्षिण पंचायत के मुखिया संजय साह ने स्पष्ट किया कि "यह ज़मीन स्कूल की है और वरीय पदाधिकारी के निर्देशानुसार पंचायत सरकार भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है। यह कार्य पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत किया जा रहा है।"

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