संस्कृति

वसुधैव कुटुम्बकम भारत की वैश्विक धारणा और भावना

भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन केवल अपने परिवार या राष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की उदात्त दृष्टि प्रदान की है। उपनिषदों का प्रसिद्ध वाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम्" केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि...
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राष्ट्र निर्माण का संकल्प परम्परा से प्रेरणा और भविष्य की दिशा

राष्ट्र केवल भू-भाग का नाम नहीं होता और न ही वह मात्र शासन-व्यवस्था से परिभाषित होता है। राष्ट्र व्यक्ति, संस्कृति, इतिहास, मूल्यों और साझा आकांक्षाओं की जीवंत अभिव्यक्ति है। भारत जैसे प्राचीन देश के लिए राष्ट्र की संकल्पना और भी...
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