मानवीय संबंधों

हवा-पानी-मिट्टी ही नहीं, अब रिश्ते भी प्रदूषित हो रहे हैं

आज ‘प्रदूषण’ की चर्चा केवल वायु, जल या मृदा तक सीमित नहीं रही। यह धीरे-धीरे मानवीय संबंधों की उस पवित्र भूमि तक पहुँच चुका है, जहाँ कभी विश्वास, प्रेम, समर्पण और सहअस्तित्व के बीज बोए जाते थे। विडंबना यह है...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार