कई चिन्तक और मनीषी अनादिकाल से सांसारिक व्यथाओं से मुक्ति हेतु अपने विचार देते आ रहे हैं

प्रत्येक धर्म का अपना एक निजी दर्शन होता है

विश्व का कोई भी धर्म या दर्शन हो, उसके कुछ अपने सिद्धान्त होते हैं। इस कार्यभूमि भारत में जितने दर्शनों का प्रादुर्भाव हुआ है, वैसा अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। कई चिन्तक और मनीषी अनादिकाल से सांसारिक व्यथाओं से मुक्ति...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार