गणतंत्र का अर्थ केवल व्यवस्था नहीं

लोकतंत्र नहीं, जनसत्ता का उत्सव है गणतंत्र

कृति आरके जैन 26 जनवरी की सुबह कोई साधारण सुबह नहीं होती। उस दिन सूरज की किरणें सिर्फ़ रोशनी नहीं लातीं, वे आत्मसम्मान की लौ जलाती हैं। सड़कों पर लहराता तिरंगा, कदम से कदम मिलाती टुकड़ियाँ और आकाश...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार