हेड कॉंस्टेबल ज्ञानचंद को मरणोपरांत मिला सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक

हेड कॉंस्टेबल ज्ञानचंद को मरणोपरांत मिला सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक

02 मार्च 2021 को उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के भरवारी रेलवे स्टेशन पर आत्महत्या करने आई महिला को बचाने के प्रयास में आरपीएफ के जवान ज्ञानचंद्र ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।  राष्ट्रपति  द्वारा स्वर्गीय ज्ञानचन्द भूतपूर्व हेड कॉन्सटेबल रेलवे सुरक्षा बल आउट पोस्ट भरवारी, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज को मरणोपरान्त सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया गया है।


प्रयागराज ब्यूरो। 02 मार्च 2021 को उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के भरवारी रेलवे स्टेशन पर आत्महत्या करने आई महिला को बचाने के प्रयास में आरपीएफ के जवान ज्ञानचंद्र ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।  राष्ट्रपति  द्वारा स्वर्गीय ज्ञानचन्द भूतपूर्व हेड कॉन्सटेबल रेलवे सुरक्षा बल आउट पोस्ट भरवारी, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज को मरणोपरान्त सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया गया है। आज घोषित इस सम्मान के लिए संपूर्ण राष्ट्र से मात्र 6 सुरक्षा कर्मियों का चयन हुआ है।

अवगत कराना है कि, भरवारी स्टेशन पर रोजनामचा लेखन ड्युटी पर तैनात ज्ञानचंद्र रात दस बजे से आउट पोस्ट भरवारी में तैनात थे। उन्होंने देखा कि, रात 11.41 बजे एक महिला तेज गति  से आ रही प्रयागराज- जयपुर एक्सप्रेस  ट्रेन के  ट्रैक पर आत्महत्या के इरादे से आकर खड़ी  थी। ज्ञानचंद ने उसे आवाज लगाई पर महिला की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया न होने से वो उसे बचाने के लिए दौड़े। उन्होंने उक्त महिला को तो रेलवे ट्रैक से बाहर धकेल दिया किन्तु महिला के बचाने के प्रयास में स्वयं तेजगति से आ रही ट्रेन के चपेट में आ गये जिससे हेड कॉस्टेबल ज्ञानचन्द गंभीर रूप से चोटिल होने के कारण वीरगति को प्राप्त हो गये। उनके इस अविस्मरणीय बलिदान को तत्कालीन रेलमंत्री  पीयूष गोयल ने भी सराहा था। 

स्वर्गीय ज्ञानचन्द का जन्म सामान्य किसान परिवार में दिनांक 09.10.1977 को ग्राम परसिया मिश्रा, पुलिस थाना खुखुन्दू जनपद देवरिया (उ.प्र.) में हुआ था जो दिनांक 25.05.2006 को रेलवे सुरक्षा बल में कॉन्सटेबल के पद पर भर्ती हुए थे। इनके द्वारा पूर्ण कर्तव्यनिष्ठा एवं ईमानदारी से ड्युटी का निवर्हन किया गया और उनके इस साहसी कार्य से रेलवे सुरक्षा बल के गौरवमयी इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया।

इनका सेवा भुगतान प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। उनका पुत्र स्नातक कर रहा है, अतः परिवार ने 1 वर्ष का समय मांगा है पढ़ाई पूरी करने के लिए। बेटे की पढ़ाई पूर्ण होते ही अनुकंपा नियुक्ति की कार्यवाही की जाएगी।

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