सरकारी स्कूल में मजदूरों का डेरा, अधिकारी कहते ‘आल इज वेल ।

सरकारी स्कूल में मजदूरों का डेरा, अधिकारी कहते ‘आल इज वेल । प्रदीप दुबे (रिपोर्टर ) ज्ञानपुर,भदोही:- नौनिहालों के बेहतर भविष्य के लिये शासन लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर भवनों का निर्माण करवा रही है, जिससे बच्चें स्कूल में पढाई कर आगे बढ़ सके। लेकिन यहां पर सरकारी भवनों के स्कूल और संस्थानों में मजदूरों

सरकारी स्कूल में मजदूरों का डेरा, अधिकारी कहते ‘आल इज वेल ।

प्रदीप दुबे (रिपोर्टर )

ज्ञानपुर,भदोही:-

नौनिहालों के बेहतर भविष्य के लिये शासन लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर भवनों का निर्माण करवा रही है, जिससे बच्चें स्कूल में पढाई कर आगे बढ़ सके। लेकिन यहां पर सरकारी भवनों के स्कूल और संस्थानों में मजदूरों ने डेरा डाल रखा है। अब बच्चें पढाई करने जाएं तो कहा जाएं ?

यही नहीं कुछ भवन और भी हैं जिन पर पशुओं ने भी डेरा डालना शुरूकर दिया है।भदोही जिले में शिक्षा की गुणवत्ता की पोल इन दिनों खुलने लगी है। इस काम में शिक्षक के साथ जनशिक्षक और संकुल प्राचार्य की लापरवाही स्कूलों के बच्चों पर भारी पड़ रहा है। पूरा मामला औराई के महाराजगंज स्थित लमसड़ा प्रार्थमिक विद्यालय का है।

सरकारी स्कूल में मजदूरों का डेरा, अधिकारी कहते ‘आल इज वेल ।

स्वतंत्र-प्रभात की न्यूज टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर महाराजगंज इलाके के लमसड़ा गांव के प्रार्थमिक स्कूलों का निरीक्षण किया,तो कई खुलासे सामने आए। कहीं शिक्षक नहीं मिले, तो कहीं स्कूलों में ताला लगा था। स्कूल का नजारा पशुओं के आराम करने का बन गया है। जानकारी के दौरान पता चला कि पिछले कई दिनों से यहा पर कोई भी शैक्षणिक काम नहीं हुए हैं। बच्चें आसपास ही खेलते हैं।

स्कूल भवन के अन्दर आराम कर रहे सड़क बनाने वाले मजदूरों ने बताया कि यह भवन खाली था और यहां स्कूल नहीं चलता। इसलिये हम यहां आराम कर रहे हैं। ग्राम के नागरिकों ने बताया कि यहां कोई अधिकारी नहीं आता है। इस वजह से यहां की पूरी शिक्षा बिगड गयी है।

सरकारी स्कूल में मजदूरों का डेरा, अधिकारी कहते ‘आल इज वेल ।

यहां तक कि प्रधानाचार्य भी जहाँ बच्चों के शिक्षा को लेकर लापरवाह हैं, वहीं शिक्षा के अधिकारी ‘आल इज वेल ‘कह कर मामले को टालते रहते है। अखिर में सवाल भी उठता रहता है कि स्थानीय, तहसील और जिले के अधिकारी क्या कर रहें है? इन की यह कैसी मॉनिटरिंग हैं? जहां पर स्कूल में शिक्षक और बच्चों की जगह मजदूरों ने ही डेरा डाल रखा है।

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