परदेशियों और ग्राम प्रधानों की लापरवाही से बढ सकती है मुश्किलें।

परदेशियों और ग्राम प्रधानों की लापरवाही से बढ सकती है मुश्किलें।

परदेशियों और ग्राम प्रधानों की लापरवाही से बढ सकती है मुश्किलें। संतोष तिवारी (रिपोर्टर ) भदोही। सरकार कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूरे देश को लाॅक डाऊन कर दिया है। जिससे लोगों के आवागमन में पूर्णतः प्रतिबन्ध लगा रहे। लेकिन लोग है कि सरकार के दिशा निर्देश को मानने को तैयार नही है। और

परदेशियों और ग्राम प्रधानों की लापरवाही से बढ सकती है मुश्किलें।

संतोष तिवारी (रिपोर्टर )

भदोही। सरकार कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूरे देश को लाॅक डाऊन कर दिया है। जिससे लोगों के आवागमन में पूर्णतः प्रतिबन्ध लगा रहे। लेकिन लोग है कि सरकार के दिशा निर्देश को मानने को तैयार नही है। और खुद के साथ साथ औरों को भी समस्या में झोंकने को तैयार है। इस तरह की लापरवाही में तो बहुत लोग देखे जा रहे है लेकिन बाहर राज्यों से आने वाले ‘परदेशी’ और ग्राम पंचायत के मुखिया की लापरवाही सरकार की मंशा पर पानी फेरने में सहायक हो सकता है। जिले में कई जगह सुनने को मिल रहा है कि पिपरीस,मोढ,सुरियावां,पिपरी,आदि ऐसे अनेक गावँ मे मुम्बई, दिल्ली समेत अन्य जगहों से आकर टहल घूम रहे है। और परदेश से आने वाले तथा खुद उनके परिजन सरकार के दिशा निर्देश को धता बताकर मनमानी कार्य कर रहे है। यदि परदेश से आने वाले सीधे जाकर अपना चेक अप करा लें फिर आराम से अपने परिवार के लोगों के साथ रहे।

सरकार लगातार लोगों सोशल डिस्टेंटिंग की बात कर रही है लेकिन यह बात बहुत लोगों के गले नही उतर रही है। और लोग अपने हिसाब से कार्य करते देखे जा रहे है। यहां एक समस्या परदेशियों के बारे में और दिख रही है कि कोई पडोसी या गांव का व्यक्ति इस लिए शिकायत नही कर रहा है कि वह जिसकी शिकायत करेगा वह उससे नाराज हो सकता है। इसीलिए दुसरे लोग शिकायत नही कर रहे है। और बाहर से आने वाले लोग परिवार व गांव को भी संक्रमण की पूरी संभावना में सहयोग कर रहे है। हालांकि प्रशासन को ज्योहि सूचना मिल रही है वह उस व्यक्ति को उठाकर ले जा रही है लेकिन लोगों को क्या कहा जाये कि लोगों की जिन्दगी दांव पर लगा रहे है। इस मामले में ग्राम प्रधान भी लापरवाही की सारें हदें पार कर रहे है। ग्राम प्रधान को तो यह पता ही नही की कौन कौन उनके गांव में इधर दो हफ्ते के अन्दर आया है? यदि पता भी होगा तो ग्राम प्रधान भी अपने आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर कोई रिस्क नही लेना चाहते है। सरकार भले ही ग्राम पंचायत में साफ सफाई जागरूता की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को दी है। इसमें कुछेक ग्राम प्रधानों को छोड दिया जाये तो ज्यादातर ग्राम प्रधान केवल कागजी घोडा दौडाकर और फोटो खिचवाकर अपना खानापुर्ति करने में ही भलाई समझ रहे है। एक ग्राम प्रधान ने तो यहां तक कह दिया कि इसके लिए फंड ही नही आता और जबकि सरकार प्रधानों को अपने ग्राम सभा में साफ सफाई, जागरूकता के लिए प्रेरित कर रही है। सरकार द्वारा निर्देशित किया गया है कि सभी सार्वजनिक स्थलों पर साबून पानी की व्यवस्था करें, जिससे लोग हाथ धो सके। कूडा दान की व्यवस्था करायें, नाली व रूके हुए पानी की निकासी को सही करें लेकिन ग्राम प्रधान है कि केवल अपने मनमाने ढंग से ही कार्य करेंगे।

इस समय देखा जा सकता है कि किसी भी गांव में सार्वजनिक स्थलों पर हाथ धोने की व्यवस्था नही है। कुछ जगह यदि हो तो वह केवल अपवाद मात्र होगा। सरकार कोरोना को लेकर जहां इतनी सख्ती से पेश आ रही है वही ग्राम प्रधानों के सिर पर जूं तक नही रेंग रही है। यदि ग्राम प्रधान चाहे तो अपने कोष से ग्राम सभा में मास्क, सेनिटाइजर इत्यादि बांट सकते है लेकिन ऐसा करना उचित नही समझते है। आज भी बहुत गांवों में गंदी सडकें, बजबजाती नालियां, रास्ते में बहता पानी देखा सकता है लेकिन स्वच्छता मिशन की धज्जियां उडाने वालों को यह सब नही दिख रहा है। केवल चुनाव के लिए अभी से गुणा गणित हो रहा है। यदि सच में ग्राम प्रधान चाहे तो उसके गांव का एक व्यक्ति भी मनमानी न कर सके पूरा गांव वही करें जो सरकार का दिशा निर्देश जारी है। लेकिन राजनीति के चक्कर में प्रधान सख्ती दिखाने के मूढ में नही है। मानते है कि सख्ती न दिखाये लेकिन लोगों को जाखरूक करके तो कोरोना वायरस से जुडी जानकारी व सावधानियां बताकर उन्हे अवगत करा सकते है। और साथ में यह भी बता दें कि जो नियम नही मानेगा उस पर प्रशासन कार्यवाही करेगा। लोग अपने आप सही कार्य करना प्रारम्भ कर देंगे। लेकिन लापरवाही की आदत से बाज न आने से लोग वही मनमानी कार्य करते है जो उनको सही लगता है। उस बात को लेकर शिसन व प्रशासन का क्या निर्देश है इससे उनको कोई लेना देना नही है। कुछ लोग तो ऐसे भी देखने को मिल रहे है जो मोदी विरोधी होने की वजह से सरकार के द्वारा जारी दिशा निर्देश का पालन नही करना चाह रहे है। और कोरोना को लेकर फालतू बयान बाजी भी करते है। लेकिन इस तरह की बात करने वालों को पता नही है कि यदि संक्रमण फैल गया तो कोई रोक नही पायेगा। इसलिए सरकार की हर बात को मानना सभी का परम कर्तव्य है। सभी ग्रामीणों का भी कर्तव्य बनता है कि यदि आपके गांव में कोई दूसरे राज्य से आया है तो आप प्रशासन को सूचित करें। क्योकि इस समय कोरोना के खिलाफ उठाया गया कदम देशहित में है। परदेशी और ग्राम प्रधान अपने जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए सरकार के निर्देशों का पालन करें और अपने साथ साथ अपने गांव और क्षेत्र के लोगों को संक्रमण से बचाने में सहयोग करें। यदि बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकले और अपने लोगों को भी न निकलने दें।

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