धनपुरी का दिल ‘आजाद चौक’ बेहाल करोड़ों के बजट के बावजूद विकास को तरसता शहर का हृदय स्थल
सुरक्षा और यात्री सुविधाओं के नाम पर स्थिति शून्य बनी हुई है
धनपुरी। नगर का हृदय स्थल कहे जाने वाला आजाद चौक आज बदहाली की चरम स्थिति में पहुंच चुका है। चार वार्डों को जोड़ने वाला यह प्रमुख चौराहा, जहां से नगर की जीवनरेखा अमरकंटक रोड गुजरती है, वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ तौर पर जिम्मेदारों की अनदेखी को उजागर कर रहा है। सुबह और शाम के समय यहां सैकड़ों छोटी-बड़ी गाड़ियों का दबाव रहता है। बावजूद इसके ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं के नाम पर स्थिति शून्य बनी हुई है।
ट्रैफिक का दबाव, अव्यवस्था हावी
चौक पर दिनभर जाम जैसे हालात बने रहते हैं। अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क किनारे अतिक्रमण से समस्या और विकराल हो जाती है। लेकिन इस दिशा में न तो कोई ठोस योजना दिखती है और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई।
यात्रियों के लिए नहीं कोई इंतजाम
इतने महत्वपूर्ण चौराहे पर मिनी बस स्टॉप तक नहीं है। यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर वाहनों का इंतजार करना पड़ता है। बैठने की व्यवस्था नहीं होने से बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान होते हैं।
पेयजल का अभाव, बढ़ती परेशानी
गर्मी के मौसम में चौक पर पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। एक हैंड पंप लगा है वर्षों से बंद है। राहगीरों को पानी के लिए भटकना पड़ता है, जिससे नगर पालिका की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अंधेरे में डूबता चौक
शाम ढलते ही चौक की तस्वीर और भयावह हो जाती है। खराब और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट्स धूल धुआं डस्ट कारण पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।नगर के सबसे व्यस्त चौराहे पर आज तक ब्ब्ज्ट कैमरे नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में न तो निगरानी संभव है और न ही जांच आसान।
फव्वारा बना उपेक्षा का प्रतीक
लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया फव्वारा गर्मी के समय जरूरत पड़ने पर बंद पड़ा है। कभी रंगीन रोशनी से जगमगाने वाला यह फव्वारा आज केवल प्रशासनिक लापरवाही की गवाही दे रहा है।
वादे और हकीकत में बड़ा अंतर
पार्षदों और नगर पालिका उपाध्यक्ष द्वारा कई बार चौक के सौंदर्यीकरण और विकास के दावे किए गए, लेकिन अब तक कोई भी योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है।
जनता का गुस्सा कब सुधरेगा आजाद चौक?
नगरवासियों में गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि हर साल करोड़ों का बजट आने के बावजूद शहर के सबसे अहम स्थल की अनदेखी समझ से परे है।
निष्कर्ष
आजाद चौक की यह बदहाली नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीरता से ध्यान दें, ताकि शहर के इस हृदय स्थल को उसकी पहचान और गरिमा वापस मिल सके।
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