स्वयं सहायता समूहों की क्रांति, महिलाओं को मिली आत्मनिर्भरता की नई पहचान

इन स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण अंचलों में रहने वाली महिलाओं के जीवन में नई रोशनी भर दी है

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बस्ती। बस्ती जिले में नवनिर्माण के 9 वर्षों के दौरान महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 1122.87 लाख रुपये की लागत से 16,041 स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत नींव रखी गई है।इन स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण अंचलों में रहने वाली महिलाओं के जीवन में नई रोशनी भर दी है।

पहले जहां महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, वहीं अब वे समूहों के माध्यम से बचत, ऋण और स्वरोजगार की गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। छोटे-छोटे बचत समूहों के जरिए महिलाएं आपसी सहयोग से पूंजी इकट्ठा कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की आर्थिक मदद भी कर रही हैं।समूहों के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं, जिनमें सिलाई-कढ़ाई, पशुपालन, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और लघु उद्योग जैसे कार्य शामिल हैं।

इससे महिलाएं अपने गांव में ही रोजगार के अवसर सृजित कर रही हैं और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रही हैं। इन प्रयासों का सीधा असर परिवारों की आय पर पड़ा है। हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और जीवन स्तर ऊंचा उठा है। महिलाएं अब अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं, जिससे सामाजिक विकास को भी गति मिली है।

स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का भी विकास हुआ है। वे ग्राम स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी निभा रही हैं और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी जागरूकता फैला रही हैं। इससे गांवों में सकारात्मक बदलाव का माहौल बना है। जनपद में स्वयं सहायता समूहों की यह पहल केवल आजीविका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को सम्मान, आत्मविश्वास और पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन गई है। नवनिर्माण के इस दौर में बस्ती की महिलाएं अब केवल घर की जिम्मेदारी नहीं संभाल रहीं, बल्कि विकास की धारा को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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