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कांपते हाथों से बेटे ने दी मुखाग्नि, तिरंगे में लिपटे पिता को देख फूट पड़ा गांव का कलेजा
राजकीय सम्मान के साथ सीआरपीएफ हवलदार शिव कुमार राणा को अंतिम विदाई
रमेश कुमार यादव
पचपेड़वा (बलरामपुर)। विकासखंड पचपेड़वा क्षेत्र के विशुनपुर विश्राम गांव का आंगन शनिवार को उस वक्त गमगीन हो उठा, जब सीआरपीएफ हवलदार/जीडी शिव कुमार राणा (45) का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा। देश की सेवा में जीवन अर्पित करने वाले वीर जवान को पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
शहीद का शव देखते ही पत्नी मीना देवी अपने आंसू रोक नहीं सकीं और पति का माथा चूमते ही बेहोश होकर गिर पड़ीं। बेटियां पिता के सीने से लिपटकर फूट-फूट कर रोती रहीं। सबसे हृदयविदारक दृश्य तब सामने आया, जब महज़ 13 वर्षीय बेटे सत्येंद्र ने कांपते हाथों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
ड्यूटी के दौरान सीने में दर्द, इलाज के दौरान निधन
हवलदार शिव कुमार राणा को 6 फरवरी को ड्यूटी के दौरान अचानक सीने में तेज दर्द उठा। उन्हें तत्काल माई हॉस्पिटल, सेक्टर-69, एसएएस नगर (पंजाब) में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही उनके निधन की खबर गांव पहुंची, पूरा इलाका शोक में डूब गया। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि हमेशा मुस्कुराते, कर्तव्यनिष्ठ शिव कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे।
2003 में सीआरपीएफ में भर्ती, अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल
वर्ष 2003 में हरियाणा से सीआरपीएफ में भर्ती हुए शिव कुमार राणा अपने अनुशासन, साहस और देशभक्ति के लिए जाने जाते थे। वे अक्सर कहा करते थे—“देश की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।” उनकी यह सोच आज भी गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
मां, पत्नी और बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़
शहीद अपने पीछे मां राम कली, पत्नी मीना देवी, दो बेटियां रेनू और अंकिता तथा इकलौते बेटे सत्येंद्र को छोड़ गए हैं।रेनू बीएड कर चुकी हैं और शिक्षक बनने की तैयारी कर रही हैं।अंकिता बीएससी की छात्रा हैं।सत्येंद्र कक्षा सात में जीसस एंड मैरी स्कूल, बलरामपुर में पढ़ता है।पति और पिता के असमय चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
गार्ड ऑफ ऑनर, नारों से गूंजा इलाका
शनिवार को पश्चिम भांभर नाले के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। सीआरपीएफ जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने वीर साथी को अंतिम सलामी दी।इस दौरान— भारत माता की जय”, “शिव कुमार अमर रहें” और “जब तक सूरज-चांद रहेगा, शिव कुमार तेरा नाम रहेगा” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। शासन की ओर से शहीद के परिवार को 1 लाख रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की गई।
भतीजा बोला— युवाओं को सेना में भर्ती होने की देते थे प्रेरणा
शहीद के भतीजे आलोक चौधरी ने बताया कि उनके चाचा पिछले दिसंबर में गांव आए थे। वे युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे और एसएसबी द्वारा आयोजित फिजिकल ट्रेनिंग कैंपों में भाग लेने की सलाह देते थे। उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले भी उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी, लेकिन इस बार किसे पता था कि यह दर्द उन्हें हम सब से हमेशा के लिए छीन ले जाएगा।

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