संतप्त संसदीय क्षेत्र आरक्षित संसदीय क्षेत्र शहडोल विकास की धारा के लिये दशकों से मोहताज है

सत्ता दल के एक से एक  सांसदों ने अपना परचम फहराया पर उपलब्धि नगन्य रही। 

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दिनेश चौधरी की रिपोर्ट
शहडोल से स्वर्गीय दलवीर सिंह जी ने इस संसदीय क्षेत्र को जो दिया वह आज भी जीवंत है।
इसके बाद दलपत सिंह, ज्ञान सिंह, राजेश नंदिनी, हिमाद्री सिंह ने अपने क्षेत्र को क्या - क्या दिया सभी को विदित है। कहने को अनुसूचित जाति, जन जाति, पिछड़ा वर्ग के लिये साशन का खजाना खुला है, योजनाओं का अम्बार लगा है पर क्रियान्वयन नग्नय है इस लिये कि हमारा संसदीय क्षेत्र अनुसूचित जन जाति अंतर्गत आता है इसी कारण हम अभिशप्त है।
 
इस अवधि में रिलायंस कंपनी ने यहाँ से मीथेन गैस का उदवहन कर फूलपुर यू. पी. में इसका संयंत्र स्थापित किया और पाइप लाइन से गैस ले जा रहें हैं। क्या इस संसदीय क्षेत्र में संयंत्र नहीं लग सकता था?फिर जैतहरी में मोजर वेयर नाम से तापीय विद्युत केंद्र लगा पर स्थानीय लोगों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिला।
 
वहीं रीवा जो कभी रेल के लिये मोहताज था आज वह रेल मार्ग से सम्पूर्ण भारत से जुड़ चुका है, रीवा से अंतर्राज्यीय हवाई सेवा भी शुरू हो गई। यह है सामान्य सीट और आरक्षित सीट का अंतर।
माननीय प्रधान मंत्री महोदय जी ने शहडोल प्रथम  प्रवास पर उद्घोष किया था कि हम जल्द ही शहडोल को हवाई उड़ान से जोड़ेंगे।
 
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी ने अपने चुनावी प्रवास में इसे दुहराया, बर्तमान मुख्यमंत्री डा0मोहन यादव जी ने भी अपने आगमन के समय इस पर मुहर लगाई तब से आज तक शहडोल से भोपाल तक उड़ान रूपी कागजीय घोड़ा उड़ रहा है दौड़ रहा है पर समाधान नहीं हुआ। प्रधान मंत्री से मुख्य मंत्री तक का आश्वासन हवाई उड़ान को पंख नहीं दे सका।
 
इस क्षेत्र को बड़े अनुनय - विनय के बाद लम्बे अंतराल में नागपुर -शहडोल ट्रेन मिली वो भी आधी - अधूरी क्योंकि यह वाया जबलपुर होकर नागपुर चलती है इससे आधा संसदीय क्षेत्र वंचित रह गया। इसे अनूपपुर जंकसन या बिजुरी तक बढ़ाने की पुरजोर माँग सगठनों, नागरिकों द्वारा की गई पर मंडल अधिकारियों ने तकनीकी कमियों का हवाला देकर शहडोल से ही परिचालन जारी रखा। अधिकारियों ने भेंट वार्ता में कहा सांसद चाह लें तो गाड़ी अनूपपुर तक बढ़ सकती है लेकिन गाड़ी का विस्तार नहीं हुआ।
 
संसदीय क्षेत्र के जागरूक संगठनों, नागरिकों ने रेल मंडल से इंदौर - बिलासपुर ट्रेन को इतवारी तक बढ़ाने का निवेदन किया, भोपाल - बिलासपुर के विस्तार का सुझाव दिया, रीवा - बिलासपुर को बढ़ाने की बात रखी पर रेल मंडल ने इन सब के विस्तार को पूरी तरह से नकार दिया क्योंकि बिलासपुर - कटनी रेल खंड से उन्हें केवल और केवल कोयले का व्यापक परिवहन करना  है।
 
प्रबुद्ध रेल मंत्री महोदय की नजर भी इस क्षेत्र पर नहीं पड़ती दीखती।ऐसे में हम मतदाता सांसद - विधायक द्वारा नित प्रति छले गए, छले जा रहें हैं, छले जाते रहेंगे। कुछ माह पहले बुढ़ार मंडल अध्यक्ष अपने उपाध्यक्षो सहित सांसद महोदया से उनके निज निवास में मुलाकात कर ट्रेन विस्तार कि माँग रखी जिसे उन्होंने स्वीकारा पर कब विस्तार होगा? अभी कि चुनाव के समय।यह अनिश्चित हैं।

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