बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को  मृत्युदंड 

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने सुनाई  फांसी की सज़ा

Swatantra Prabhat Desk Picture
Published On

मानवता के विरुद्ध अपराध’ में दोषी करार

ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की पद से हटाई गई प्रधानमंत्री और अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना को देश की अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) ने एक ऐतिहासिक निर्णय में मृत्युदंड की सज़ा सुनाई है। न्यायालय ने उन्हें पिछले वर्ष जुलाई में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हुए मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए दोषी पाया है।
न्यायाधिकरण ने सोमवार को यह निर्णय सुनाया, जिसमें कहा गया कि हसीना ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए हिंसा भड़काई और हत्याओं का आदेश दिया।
 
क्या है मामला और न्यायालय का निर्णय?
यह मामला जुलाई-अगस्त 2024 में हुए आरक्षण-विरोधी छात्र आंदोलन से जुड़ा है, जो जल्द ही हसीना सरकार के विरुद्ध एक बड़ा जन-विद्रोह बन गया था।
 मुख्य आरोप: न्यायालय ने शेख हसीना को उकसाने के कार्य, हत्याओं के आदेश देने और अत्याचारों को रोकने में विफलता सहित कई मामलों में दोषी ठहराया है।
 
अदालत का कथन: न्यायमूर्ति गुलाम मोर्तुजा मोजुमदार की अध्यक्षता वाली पीठ ने 453 पन्नों के अपने निर्णय में कहा कि प्रमाणों से यह स्पष्ट है कि हसीना ने ढाका में प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हवाई निगरानी यंत्रों (ड्रोन), हेलीकॉप्टरों और घातक अस्त्रों के उपयोग का निर्देश दिया था।
 अन्य दोषी: हसीना के साथ, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मृत्युदंड की सज़ा सुनाई गई है, जबकि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को सरकारी साक्षी बनने के कारण पाँच वर्ष की कैद मिली है।
 
भारत में निर्वासित हैं शेख हसीना
78 वर्षीय शेख हसीना इस समय भारत में निर्वासन में अपना जीवन बिता रही हैं। वह अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद सत्ता से बाहर हो गई थीं और तभी से भारत में हैं।
अनुपस्थिति में निर्णय: न्यायाधिकरण ने यह सज़ा हसीना की अनुपस्थिति में सुनाई, क्योंकि उन्होंने अदालत की सुनवाई में सम्मिलित होने से इनकार कर दिया था।
 
बांग्लादेश में तनाव
निर्णय के बाद बांग्लादेश में, विशेषकर ढाका में तनाव की खबरें हैं।
 सुरक्षा व्यवस्था के तहत राजधानी और देश के विभिन्न भागों में अर्धसैनिक बल और पुलिस की तैनाती की गई है।
 हसीना की पार्टी अवामी लीग ने इस निर्णय के विरोध में देशव्यापी बंद का आह्वान किया है।
 
क्या है आईसीटी?
बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) कोई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय नहीं है। यह बांग्लादेश की एक स्थानीय अदालत है जिसका गठन 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए किया गया था।
अब यह देखना बाकी है कि हसीना के वकील उच्च न्यायालय में इस निर्णय के विरुद्ध क्या अपील करते हैं और अंतरिम सरकार भारत से उनके प्रत्यर्पण (दूसरे देश से अपराधी को वापस लाना) की मांग को लेकर क्या कदम उठाती है।
 
 

About The Author

Post Comments

Comments