Mustard Seeds: काली या पीली सरसों में क्या अंतर है ? किसान भाई जानें कौन सा है ज्यादा फायदेमंद

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Mustard Seeds: किसान भाइयों के लिए आज हम जरूरी जानकारी लेकर आयें है। आइए जानते है आज काली या पीली सरसों में क्या अंतर है और कौन सी उनके लिए ज्यादा फायदेमंद रहने वाली है। उत्तर भारत में प्रायः पीली सरसों का उपयोग रसोई में मसाले के रूप में किया जाता है। मिली जानकारी के अनुसार, इसके दाने हल्के पीले रंग के होते हैं और इसका स्वाद काली सरसों की तुलना में थोड़ा मृदु और हल्का तीखा होता है। जानकारी के मुताबिक, यही वजह है कि पीली सरसों का प्रयोग मुख्यतः चटनी, अचार और सॉस बनाने में किया जाता है। इसके बीजों से निकला तेल रंग में हल्का और स्वाद में कम तीखा होता है। Mustard Seeds

मिली जानकारी के अनुसार, गांवों की गलियों से लेकर रसोई के तड़के तक सरसों हर भारतीय घर का अहम हिस्सा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सरसों भी दो प्रकार की होती है पीली और काली सरसों। दिखने में ये भले एक जैसी लगती हैं, लेकिन दोनों की खुशबू, स्वाद और औषधीय गुणों में बड़ा अंतर है। Mustard Seeds

जानकारी के मुताबिक, उत्तर भारत में प्रायः पीली सरसों का उपयोग रसोई में मसाले के रूप में किया जाता है। इसके दाने हल्के पीले रंग के होते हैं और इसका स्वाद काली सरसों की तुलना में थोड़ा मृदु और हल्का तीखा होता है। यही वजह है कि पीली सरसों का प्रयोग मुख्यतः चटनी, अचार और सॉस बनाने में किया जाता है। मिली जानकारी के अनुसार, इसके बीजों से निकला तेल रंग में हल्का और स्वाद में कम तीखा होता है। पीली सरसों के दाने विटामिन ए, सी, और ई, मैग्नीशियम और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो पाचन सुधारने और प्रतिरक्षा बढ़ाने में मदद करते हैं। Mustard Seeds

मिली जानकारी के अनुसार, काली सरसों यानी “राई” का रंग गहरा भूरा या काला होता है और इसका स्वाद तेज़, तीखा और झनझनाहट भरा होता है। यह सरसों मुख्यतः दक्षिण भारत और बंगाल की रसोई में लोकप्रिय है। जब राई को तेल में तड़का दिया जाता है, तो इसकी खुशबू पूरी रसोई को महका देती है। जानकारी के मुताबिक, काली सरसों का तेल औषधीय दृष्टि से बेहद उपयोगी माना जाता है। यह जोड़ों के दर्द, सर्दी-जुकाम और त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभकारी है। इसकी तीव्रता के कारण यह शरीर की रक्तसंचार प्रणाली को सक्रिय करने में भी मदद करता है। Mustard Seeds

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जानकारी के मुताबिक, खेती के दृष्टिकोण से भी दोनों में फर्क है। पीली सरसों को ठंडे मौसम में अधिक पसंद किया जाता है, जबकि काली सरसों अधिक अनुकूलनशील और रोग-प्रतिरोधक होती है। मिली जानकारी के अनुसार, किसान पीली सरसों से तेल के साथ-साथ फूल और मधुमक्खी पालन के लिए भी लाभ उठाते हैं। Mustard Seeds

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मिली जानकारी के अनुसार, कुल मिलाकर पीली सरसों स्वाद और सौम्यता की प्रतीक है, जबकि काली सरसों तासीर और तीखेपन की मिसाल। दोनों ही अपने-अपने ढंग से भारतीय भोजन और स्वास्थ्य परंपरा की अहम कड़ी हैं। Mustard Seeds

जानकारी के मुताबिक, कहावत भी है कि “राई के दाने जितना छोटा, पर काम बड़ा करता है” सच यही है कि चाहे पीली हो या काली, सरसों हर घर की थाली में अपनी पहचान बनाए रखती है।

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संदीप कुमार मीडिया जगत में पिछले 2019 से ही सक्रिय होकर मीडिया जगत में कार्यरत हैं। अख़बार के अलावा अन्य डिजिटल मीडिया के साथ जुड़े रहे हैं। संदीप का पॉलिटिकल न्यूज, जनरल न्यूज में अनुभव रहा है। साथ ही ऑनलाइन खबरों में काफी अनुभव है l 

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