मरौली खण्ड पांचः ग्राम चटगन में गहराया पेयजल संकट

- नदी में अवैध खनन होने से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग

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- बेमौत मर रहे जलीय जीव, प्यास से तड़पर रहे जलीय जानवर

खनन कारोबारी की कारस्तानी का खामियाजा भुगत रहे लोग

बांदा। मरौली खण्ड पांच के खनन माफिया की एक गलती की सजा पूरा गांव भुगत रहा है। एक ओर जहां इस खदान के संचालक के द्वारा दबंगई के बल पर नदी की जलधारा में अवैध खनन कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। तो वहीं दूसरी ओर एक तो खदान संचालक की मशीनों से खेत के खराब होने से रोटी का संकट जहां सता रहा है। तो वहीं नदी की जलधारा में अवैध तरीके से मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए खनन कार्य कराने से अब चटगन गांव में पेयजल संकट भी गहराने लगा है। सोचिये जब शीतकालीन सत्र शुरू होने के समय यह हाल तो गर्मी के दिनों में लोगों को कितनी परेशानी झेलनी पड़ेगी इस बात का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है।

मरौली खण्ड पांच के खनन कारोबारी की कारस्तानी से जहां मनुष्य पेयजल संकट से जूझ रहा है तो वहीं जलीय जीव भी बमौत काल के गाल में समाते चले जा रहे हैं। वहीं बुंदेली लोकगीत में सुनाई पड़ती पुरानी चंद पंक्तियां जो आज के दौर में बुंदेलखंड के जनपद बांदा मुख्यालय से मात्र कुछ किलो मीटर ग्राम चट्टान व उसके आस पास के क्षेत्रों के लिए अक्षरतः सिद्ध हो रही है ‘सखी जल गगरी ना फूटे, नहीं तो खसम मर जाई’ वैसे तो केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी योजना हर घर जल  का शुभारंभ हो चुका है। लेकिन ग्राम चटगन को ही ले तो वहां के स्थानीय ग्रामीणों को बूंद - बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

4ग्रामवासियों को पीने का पानी लाने के लिए अपने ग्राम चटगन से 3 किलोमीटर दूर ग्राम छेराव जाना पड़ता है यहां पर कहने को तो हर घर जल योजना अंतर्गत नल व पाइपलाइन डाली गई है जबकि धरातल में 4 इंच पाइप डालने की जगह ठेकेदार द्वारा मानक के विपरीत मात्र 2 इंच पाईप लाईन गांव की सड़कों बर्बाद कर डाल दिया है। जिससे बारिश के दिनों में ग्रामीणों को चुटहैल होकर कीमत चुकानी पड़ा रही है। ऐसा ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया कि लगातार शिकायतों को करने पर कुछ अफसर आए, तो नलो कि टोटियों में थोड़ी देर के लिए पानी आया जैसे अफसर वापस लौटे तो वैसे ही नालों की टोटियों से पानी गायब हो गया।

वही पर यदि पारंपरिक जल स्रोत की बात की जाए बांदा समेत आस पास के कई गांवों की जीवन धारा, जीवनदायिनी केन नदी जो इस ग्राम के सीमा से होकर बहती है, उसे अवैध बालू खनन करने वाले बालू माफियाओं की नजर लग गई है, बालू खदान मरौली खंड 5 की तरफ से भी बहकर आती धारा का जल प्रतिबंधित मशीन पोकलैंडो  मशीनों के अत्याधिक प्रयोग एवं जलधारा में खुदाई के चलते वह पानी इतना प्रदूषित हो चुका है मनुष्यों को तो दूर पशुओं के पीने आदि के प्रयोग लायक नहीं रह गया यह समस्या केवल एक ग्राम की नहीं क्षेत्र के कई ग्रामों की है।

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जो माफियाओं के डर से जब लोगों ने डरी जुबान से क्षेत्र के दौरा करने पहुंचे किसान नेता बलराम तिवारी को अवगत कराया। जिस पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के मंडल अध्यक्ष ने स्थानीय नागरिकों भरोसा दिलाते हुए ग्रामीणों से शीघ्र ही इस जल समस्या का निराकरण जिला प्रशासन स्तर पर कराने का भरोसा दिया, साथ ही यह घोषणा की जल्द से जल्द अगर इस जल समस्या का समाधान शासन स्तर पर नहीं होता है तो वह स्थानीय ग्रामीण वासियों के संग सड़कों में उतर ग्रामीणों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर आंदोलन करेंगे। देखना यह है प्रशासन कब तक स्थानीय जनता की इस गंभीर जल समस्या को कब संज्ञान लेता है साथ क्या कार्यवाही करता है।

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