बीएसए कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार जिम्मेदार साधे मौन

बीएसए कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार जिम्मेदार साधे मौन

स्वतंत्र प्रभात 
लखीमपुर खीरी बीएसए कार्यालय में फैला भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात कई महीनो से लिखा पढी में तैनात है। परंतु प्रियदर्शी पांडे से काम नहीं लिया जा रहा है। शाम को बीएसए कार्यालय की फाइल लेकर पूर्व वरिष्ठ सहायक कमलेश्वर बाबू के घर एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी  जाता है।
 
वहीं पर कमलेश्वर बाबू अपने घर बैठकर बीएसए ऑफिस का काम निपटाते हैं। जो वरिष्ठ लिपिक प्रियदर्शी पांडे है उनसे महज हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं। ऐसी जानकारी विभागीय गोपनीय सूत्रों द्वारा दी गई है। दूसरी तरफ बी आर सी फूलबेहड़ में आशीष अवस्थी बाबू के  पद पर नियुक्ति है। आशीष अवस्थी से बाबू का काम ना लेकर कमरुल अकाउंटेंट लेखाकार से खंड शिक्षा अधिकारी फूलबेहड काम ले रहे हैं।
 
वहीं पर कमरुल शासनादेश की धज्जियां उड़ाकर फर्जी शिक्षकों के अंक पत्रों की जांच की शिकायत गायब कर रहे हैं। कमरुल अकाउंटेंट लेखाकार से साठगांठ कर  शिक्षक आशीष विद्यालय नहीं जाने की चर्चा जोरों पर है। उसको वेतन फर्जी हाजिरी लगाकर निकलवाने में महारत हासिल है। इतना ही नहीं ब्लॉक फूलबेहड के गांव तेतारपुर के एक शिक्षक के खिलाफ थाना फूलबेहड़ में एक छात्रा ने मुकदमा लिखवाया था।
 
जिसकी विवेचना यादव दरोगा जी कर रहे थे। उस मामले में भ्रष्ट शिक्षक से पैसा लेकर फाइनल रिपोर्ट लगवा दी गई ।इसीलिए भ्रष्टतम  शिक्षकों को बचाने का काम खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात कमरुल करते हैं। यह जानकारी विभागीय लोगों द्वारा दी गई है। बेसिक शिक्षा विभाग में पहले भ्रष्टाचार की बात की जाए तो फर्जी अंक पत्र लगा शिक्षण कार्य संलग्न शिक्षकों के विषय में दर्जनों शिकायतें होने के बाद भी आज तक फर्जी शिक्षकों के अंक पत्रों की जांच तक नहीं कराई गई है।
 
जब भी कोई शिकायत फर्जी शिक्षकों के अंक पत्रों की जांच करने संबंधी बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से खंड शिक्षा अधिकारी फूलबेहड के कार्यालय में पहुंचती है तो कार्यालय में तैनात यही साहब शिकायतों को कहां दबा देते हैं इसका कोई अता-पता नहीं चलता। और इसके एवज में फर्जी शिक्षकों से बंधी माहवारी वसूल किए जाने की भी जन चर्चा जोरों पर है। शायद यही कारण है आज दर्जनों शिकायत  होने के बावजूद भी फर्जी अंक पत्रों पर कार्यरत शिक्षकों के अंक पत्रों की जांच तक नहीं कराई गई।
 

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