आखिर कब तक सोता रहेगा पुलिस प्रशासन और पत्रकारों पर होते रहेंगे प्राणघातक हमले अहम सवाल

गत माह कई पत्रकारों पर हो चुके हैं जानलेवा हमले मूकदर्शक बना जिला प्रशासन सवाल पूछना पड़ जाता है भारी सवाल पूछा कि होने लगी खबर नवीस की पिटाई

आखिर कब तक सोता रहेगा पुलिस प्रशासन और पत्रकारों पर होते रहेंगे प्राणघातक हमले अहम सवाल

नित्यानंद बाजपेई लखीमपुर खीरी ।

एक तरफ प्रदेश के मुखिया एवं पुलिस महानिदेशक द्वारा जारी फरमान में पत्रकारों के साथ अभद्रता करने वालों के विरुद्ध तत्काल कार्यवाही किए जाने के आदेश पारित कर रहे हैं वहीं उन्हीं के मातहतों द्वारा मुख्यमंत्री के आदेशों को पलीता लगाते हुए पत्रकारों पर हमला करने वाले हमलावरों को संरक्षण दिया जा रहा है

पत्रकार अपने साथ घटित घटना के लिए न्याय की आस में प्रशासन की चौखट पर अपनी चप्पले घिसते देखे जा रहे हैं गौरतलब हो की घटनाओं पर नजर डालें तो गत माह कई पत्रकारों के साथ जानलेवा हमले की घटनाएं घटी घटना नंबर एक निघासन के पत्रकार नंदकिशोर आर्या पर लोगों द्वारा रंजीसन कर जानलेवा हमला करके लहूलुहान कर दिया गया उक्त मामले में पुलिस ने साधारण सी धारा में मुकदमा पंजीकृत कर के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है

आज घटना के कई दिनों बाद भी किसी भी हमलावर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी दूसरी घटना थाना फूलबेहड़ क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नरहर की है जहां एक पत्रकार द्वारा अरसे से खराब पड़े नल के संबंध में सवाल पूछा ही था कि ग्राम प्रधान नरहर ने पत्रकार को जमीन पर पटक दिया और गला दबाने लगा अगर लोगों ने बीज बचाओ ना किया होता तो आज पत्रकार शहीद हो गया होता

इसमें भी पुलिस द्वारा साधारण सी धारा में मुकदमा पंजीकृत करके पत्रकार को चलते कर दिया गया आजतक प्रधान की गिरफ्तारी अथवा मामले की जांच करना तक उचित नहीं समझा गया तीसरी घटना तहसील कोतवाली लखीमपुर की है यह पर पत्रकार विशाल भारद्वाज द्वारा नगर पंचायत ओयल ढकवा में दबंगों द्वारा तालाब को पाटकर अवैध कब्जा कर लिया गया था उक्त मामले में तहसीलदार लखीमपुर द्वारा दिनांक 15 / 7/ 2021 को बेदखली व क्षतिपूर्ति का आदेश पारित किया गया था लेकिन आदेश होने के डेढ़ साल बाद भी अवैध कब्जा ना हटवाए जाने के संबंध में लेखपाल उदय भान सिंह से सवाल पूछ लिया

जिससे लेखपाल उदय भान सिंह ने अपने 5.6 साथियों के साथ आकर पत्रकार के साथ मारपीट पर आमादा हो गया मौके पर काफी लोगों के आने के बाद जैसे-तैसे मामला शांत कराया गया घटना के समय एसडीएम सदर तहसीलदार तहसील में मौजूद थे ऐसा लेखपाल उदय भान ने कहा लेकिन है दबंग लेखपाल के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई

यदि प्रशासन जरा सा भी पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर होता संजीदा तो शायद यह घटनाएं नहीं घटती और नाही मुख्यमंत्री के आदेशों की होती भारी किरकिरी प्रशासन की इस कार्यशैली से आहत पत्रकारों में भारी आक्रोश पनप रहा है। इस संबंध में निघासन कोतवाल ने बताया कि विवेचना चल रही है अभी मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है ।

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