धर्म ग्रंथों और धर्म की आलोचना राजनैतिक दल के नेता सहित किसी  को भी नही देता शोभा :- बाल्मीकि उपाध्यय

धर्म ग्रंथों और धर्म की आलोचना राजनैतिक दल के नेता सहित किसी  को भी नही देता शोभा :- बाल्मीकि उपाध्यय

स्वतंत्र प्रभात
अंबेडकर नगर। भारत देश की खूबशूरती सभी धर्मों और उनके अनुयायियों के आस्था की मान सम्मान से है। धर्म ग्रंथों और धर्म की आलोचना राजनैतिक दल के नेता सहित किसी  को भी शोभा नहीं देता है।
        उपरोक्त विचार भाजपा जिला मीडिया प्रभारी बाल्मीकि उपाध्याय ने समाज वादी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा राम चरित मानस के विषय में दिए गए आपत्ति जनक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए व्यक्त किया।मीडिया प्रभारी ने कहा है कि राम चरित मानस हिन्दू समाज की आस्था और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चंद्र जी की समाज को दिखाए गए सामाजिक न्याय और व्यवस्था को दर्शाता है।जिसकी आलोचना करना हिंदू समाज के साथ साथ सम्पूर्ण सनातन धर्म का विरोध है।भगवान राम समाज के हर जाति के कल्याण और उनके उत्थान और राक्षसी प्रवित्ति की नाश के लिए ही पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। गोस्वामी तुलसीदास ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चंद्र जी की उत्तम चरित्र का ही वर्णन राम चरित मानस में किया है।जिसे सम्पूर्ण हिंदू समाज आदर्श के रूप में सदियों से मानता आया है।मीडिया प्रभारी बाल्मीकि उपाध्याय ने कहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य का बयान समाजवादी पार्टी की हिंदू समाज के प्रति घृणा और विरोध का परिचय है।उनकी बयान ने समाज वादी पार्टी की मुस्लिम तुष्टिकरण की  नीति का प्रदर्शन कर दिया है।भाजपा जिला मीडिया प्रभारी ने कहा है कि घृणित मानसिकता के समाज वादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्यवाही किए जाने की आवश्यकता है।

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