सामाजिक सोच

हे समाज, कुछ चेहरों की भूल पर हर बेटी को दोषी मत ठहराओ

कृति आरके जैन यदि किसी मोहल्ले में एक घर की दीवार गिर जाए, तो क्या पूरा शहर जर्जर घोषित कर दिया जाता है? यदि एक डॉक्टर लापरवाह निकल जाए, तो क्या पूरा चिकित्सा जगत अपराधी हो जाता...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

दिल्ली फिर शर्मसार : निर्भया के बाद भी क्यों नहीं थम रही महिलाओं के खिलाफ दरिंदगी

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर ऐसी अमानवीय घटना की गवाह बनी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। चलती बस में एक महिला के साथ गैंगरेप की घटना ने लोगों को वर्ष 2012 के बहुचर्चित निर्भया कांड...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय