महात्मा गांधी
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वसुधैव कुटुम्बकम भारत की वैश्विक धारणा और भावना
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By Swatantra Prabhat UP
भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन केवल अपने परिवार या राष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की उदात्त दृष्टि प्रदान की है। उपनिषदों का प्रसिद्ध वाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम्" केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि...
आत्मनिर्भरता स्वाभिमानी राष्ट्र का प्रतीक
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By Swatantra Prabhat UP
स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल...
छोटे-छोटे निरंतर प्रयासों से खुलते बड़े सफलता के द्वार।
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By Abhinav Shukla
मानव जीवन संघर्ष, परिश्रम, धैर्य और निरंतर प्रयासों की एक लंबी कहानी है। संसार में जितने भी महान व्यक्ति हुए उनकी सफलता किसी एक दिन की चमत्कारी घटना नहीं थी, बल्कि वर्षों तक किए गए छोटे-छोटे सतत प्रयासों का जिस...

