भारतीय दर्शन

वसुधैव कुटुम्बकम भारत की वैश्विक धारणा और भावना

भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन केवल अपने परिवार या राष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की उदात्त दृष्टि प्रदान की है। उपनिषदों का प्रसिद्ध वाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम्" केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

भारतीय नवसंवत्सर का स्वर्णिम आरंभ

  महेन्द्र तिवारी    हिन्दू नववर्ष भारतीय संस्कृति का वह जीवंत प्रतीक है, जो केवल समय के परिवर्तन का संकेत नहीं देता, बल्कि जीवन के मूल्यों, परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का संदेश भी लेकर आता है। जब...
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