हिंदी लेख

तनाव के बढ़ते कारण और संतुलित जीवन की आवश्यकता

आज का युग विज्ञान तकनीक और भौतिक सुविधाओं का युग है। मनुष्य ने विकास के अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। इसके बावजूद उसका जीवन पहले की अपेक्षा अधिक तनावपूर्ण होता जा रहा है। बाहरी सुख सुविधाओं की वृद्धि के...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

वसुधैव कुटुम्बकम भारत की वैश्विक धारणा और भावना

भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन केवल अपने परिवार या राष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की उदात्त दृष्टि प्रदान की है। उपनिषदों का प्रसिद्ध वाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम्" केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय