उप निरीक्षकों की एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित

उप निरीक्षकों की एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित

उप निरीक्षकों की एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित


बाराबंकी।

पुलिस अधीक्षक  अनुराग वत्स के निर्देशन में पुलिस लाइन के सभागार में उप निरीक्षकों की एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित हुई।

कार्यशाला का शुभारंभ क्षेत्राधिकारी नगर द्वारा किया गया। इस अवसर पर क्षेत्राधिकारी आतिश कुमार सिंह ने कहा कि पोक्सो एक्ट के पीड़िताओं को उचित और समय पर न्याय मिले इस लिए मामलों की विवेचना सही हो इसलिए एक्ट के हर पहलुओं की जानकारी होनी चाहिए, यह कार्यशाला आपको सही और नए नियमो की जानकारी होगी।

 चाइल्डलाइन के निदेशक रत्नेश कुमार ने किशोर न्याय बालकों की देखरेख एवं संरक्षण अधिनियम 2015 के प्रावधानों को बताया रत्नेश कुमार ने उप निरीक्षकों से कहा कि जितने भी देखरेख एवं संरक्षण पाने के जरूरतमंद बच्चे पुलिस के संरक्षण में आएं उनकी सूचना 24 घंटे के अंदर बाल कल्याण समिति को देना आवश्यक है। जिले में बाल कल्याण समिति ही बच्चों के संरक्षण की सर्वोच्च पावर की कमेटी है जो बच्चों को विधिक संरक्षण प्रदान कराती है।

अभिमुखीकरण कार्यशाला में विशेष रूप से पोक्सो एक्ट की बारीकियों और क्रियान्वयन की स्थितियों को लेकर महिला कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश के राज्य सलाहकार श्री प्रीतेश कुमार तिवारी ने डीजी परिपत्र 39 एवं डीजी परिपत्र 40 के द्वारा दिए गए निर्देशों तथा एसओपी को विस्तार से बताया। श्री तिवारी ने कहा की किसी भी परिस्थिति में बच्चा अगर पुलिस के संरक्षण में आता है तो उसकी सूचना 24 घंटे के अंदर दी जानी आवश्यक है पोक्सो एक्ट की पीडिताओं के संरक्षण को लेकर आवश्यक है कि पीड़िता का 24 घंटे के अंदर संपूर्ण मेडिकल परीक्षण हो और उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाए

 पुलिस के संरक्षण में आए बच्चों की आयु निर्धारण को लेकर जारी डीजी परिपत्र 40 के प्रावधानों को भी बताया गया आयु निर्धारण में सर्वप्रथम हाई स्कूल के शैक्षिक अभिलेख में अंकित जन्मतिथि का आधार लिया जाएगा यदि हाई स्कूल का कोई प्रमाण पत्र नहीं है तो सक्षम अधिकारी द्वारा निर्गत जन्म प्रमाण पत्र अथवा प्रथम विद्यालय प्रवेश का अभिलेख का आधार आयु निर्धारण के लिए मान्य है। और यह सब भी नहीं उपलब्ध है तो मेडिकल बोर्ड द्वारा परीक्षण की गई आयु का आधार लिया जाएगा।

 तिवारी ने यह भी बताया कि विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों के संबंध में उनके न्याय निर्णयन की प्रक्रिया है कि जिस अपराध में सजा का प्रावधान 7 वर्ष से कम है उन अपराधों में बच्चों के मामलों की एफआईआर नहीं दर्ज की जाएगी उनके मामले जीडी एंट्री और सोशल बैकग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर किशोर न्याय बोर्ड में प्रस्तुत किए जाएंगे। इस कार्यशाला में चाइल्ड लाइन की टीम सहित लगभग सभी थानों के उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।

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