असम विश्वविद्यालय सिलचर में “आइंस्टीन का सामान्य सापेक्षता सिद्धांत और उससे आगे” विषय पर 5 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

जिससे छात्रों एवं शोधार्थियों को आधुनिक भौतिकी की गहन अवधारणाओं की बेहतर समझ मिल सके

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

श्रीभूमि : असम विश्वविद्यालय, सिलचर (AUS) के भौतिकी विभाग द्वारा पुणे स्थित इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA) तथा IUCAA सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ICARD) के सहयोग से आज “आइंस्टीन का सामान्य सापेक्षता सिद्धांत और उससे आगे” विषय पर पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला गत 20 से 24 अप्रैल 2026 तक भौतिकी विभाग के मेघनाद साहा कॉन्फ्रेंस रूम में आयोजित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य पाठ्यपुस्तकीय ज्ञान और उन्नत शोध-स्तरीय समझ के बीच की खाई को कम करना है, जिससे छात्रों एवं शोधार्थियों को आधुनिक भौतिकी की गहन अवधारणाओं की बेहतर समझ मिल सके।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता भौतिकी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. अशोक कुमार सेन ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक एवं प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. पैट्रिक दासगुप्ता उपस्थित रहे। मंच पर विभागाध्यक्ष प्रो. हिमाद्रि शेखर दास, कार्यशाला समन्वयक एवं स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज के डीन प्रो. अत्रि देशमुख्य, तथा IUCAA समन्वयक डॉ. अप्रतिम गांगुली सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त आईएसआई कोलकाता की डॉ. भास्वती मंडल एवं आईआईटी गुवाहाटी के डॉ. सयान चक्रवर्ती सहित अन्य विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रतीकात्मक पौधारोपण के साथ की गई। इसके पश्चात उद्घाटन व्याख्यान में प्रो. अत्रि देशमुख्य ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन विशेष रूप से उन विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जिन्हें सामान्य सापेक्षता जैसे जटिल विषयों पर व्यवस्थित प्रशिक्षण कम मिलता है।

डॉ. अप्रतिम गांगुली ने IUCAA की शैक्षणिक भूमिका और ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की। वहीं प्रो. हिमाद्रि शेखर दास ने विभाग की शैक्षणिक उपलब्धियों और निरंतर आयोजित होने वाली अकादमिक गतिविधियों का उल्लेख किया। मुख्य अतिथि प्रो. पैट्रिक दासगुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में भी गणितीय समस्याओं को स्वयं हल करने की प्रक्रिया शोधकर्ताओं के बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

प्रतिभागियों की भागीदारी
इस कार्यशाला में कुल 61 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें पीएचडी शोधार्थी, एम.एससी. छात्र तथा स्नातक स्तर के विद्यार्थी शामिल हैं। प्रतिभागी असम एवं त्रिपुरा के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से आए हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन सुश्री संचाली नाथ मजूमदार द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें