किडनी के अंतरराष्ट्रीय अवैध कारोबार के खिलाफ गहन जांच में जुटी कानपुर पुलिस

पांच डॉक्टरों समेत अब तक 6 गिरफ्तार

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कानपुर। यहां किडनी के अवैध अंतर्राष्ट्रीय कारोबार का पर्दाफाश करने के बाद  पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में लगातार जुटी हुई है। अब तक इस मामले में अस्पताल संचालक पांच डॉक्टरों समेत आधा दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया है ,जबकि फरार लोगों में मेरठ के डॉ. अफजल डॉ. रोहित और वैभव अनुराग की तलाश में भी छापेमारी जारी है। जहां तक किडनी की आवाज ट्रांसप्लांट के खुलासे का सवाल है। इसका पर्दाफाश 50,000 रुपये के विवाद ने करा दिया। 
 
पुलिस के अनुसार किडनी रैकेट में गिरफ्तार छह लोगों में पांच डॉक्टर शामिल हैं। इस रैकेट में कम से कम 40 लोगों, जिनमें विदेशी भी शामिल हैं, की अवैध सर्जरी की गई थी। आरोप है कि किडनी 10 लाख रुपये में खरीदी जाती थी और 60 लाख रुपये में बेची जाती थी, लेकिन उनका पर्दाफाश एक छात्र के साथ हुए विवाद से हुआ, जिसने उन्हें अपनी किडनी बेची थी। यह विवाद 50,000 रुपये की मामूली रकम को लेकर था।
 
जानकारी के मुताबिक बिहार के समस्तीपुर के एमबीए छात्र आयुष ने पुलिस को किडनी रैकेट के बारे में सूचना दी थी। मेरठ में पढ़ने वाले आयुष ने आर्थिक तंगी के चलते आरोपियों से अपनी एक किडनी 10 लाख रुपये में बेचने का सौदा किया था। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। उनका दावा है कि उन्हें तय रकम से 50,000 रुपये कम यानी सिर्फ 9.5 लाख रुपये ही मिले।
 
फिलहाल सूचना मिलने के बाद जैसे ही जांच शुरू हुई और सुराग भी मिलने लगे। पुलिस को सबसे पहले शिवम अग्रवाल के बारे में पता चला, जो एक एम्बुलेंस चालक था और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को लुभाने के लिए टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता था। आयुष भी उसके जाल में फंस गया था। उसे 10 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन आरोपी ने कथित तौर पर मुजफ्फरनगर की एक मरीज पारुल तोमर के परिवार से 60 लाख रुपये की उगाही की थी, जिसे गुर्दे की सख्त जरूरत थी।
 
मिली जानकारी के आधार पर, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने कल्याणपुर क्षेत्र के तीन अस्पतालों, जिनमें आहूजा अस्पताल, प्रिया अस्पताल और मेड लाइफ अस्पताल शामिल हैं, पर संयुक्त छापेमारी की। छापेमारी के दौरान, मेड लाइफ अस्पताल बिना पंजीकरण के संचालित पाया गया। पुलिस ने आयुष और पारुल को अस्पताल परिसर से बरामद किया। आयुष की हालत गंभीर होने के कारण उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
 
पुलिस के अनुसार अब तक आहूजा अस्पताल के मालिक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह और शिवम अग्रवाल को भी गिरफ्तार कर लिया है। इन अभियुक्तों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने बताया कि अभी भी फरार लोगों में डॉ. अफजल, डॉ. रोहित और वैभव अनुराग की तलाश जारी है।
 
वहीं दूसरी ओर पत्रकारों से बातचीत में पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने संकेत दिया कि यह गिरोह केवल कानपुर में ही सक्रिय नहीं था, बल्कि इसके संबंध दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और यहां तक ​​कि नेपाल से भी हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि माना जाता है कि इस गिरोह ने विदेशियों सहित 40 से 50 अवैध प्रत्यारोपण किए थे। फिलहाल पूरे प्रकरण की गहन जांच लगातार जारी है ,जिसमें और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

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