मानसूनी वर्षा के अभाव में फिलहाल कृषि कार्य बाधित 

22 मई से 8 जुलाई तक हुई 160.4 एमएम  वर्षा पात 

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3 जुलाई की सर्वाधिक 31. 4 मिली-मीटर हुई बारिश

पाकुड़िया/पाकुड़/झारखण्ड:- कहा जाता है भारत के मेहनती एवम ईमानदार कृषकों की खेती की निर्भरता मानसूनी वर्षा पर है। यद्यपि देश के विभिन्न राज्यों में कृषि के लिए सिंचाई के अलग-अलग स्थाई श्रोत हैं, तथापि देश के बड़े भू-भाग अब भी सिंचाई की सुविधा से वंचित है और उन्हें वर्षा पर आश्रित रहना पड़ता है। विगत दिनों देश के अनेक राज्यों में मानसूनी बारिश के प्रकोप से बाढ़ से बड़े पैमाने पर जान-माल की क्षति हो रही है।जबकि झारखण्ड राज्य के पाकुड़ जिला के पाकुड़िया प्रखण्ड में मौसमी बारिश के बिना कृषि कार्य पूर्णतः बाधित है।
 
यदि एक नजर पाकुड़िया में वर्षापात पर डाली जाय तो विदित होगा कि 22 मई से 8 जुलाई तक 160.4 एमएम वर्षा हुई है जबकि तीन जुलाई को 31.4 मिली-मीटर सर्वाधिक बारिश हुई है। प्रखण्ड के किसानों को नीले आसमान और तेज धूप के बीच तैर रहे बादलों के समूह को आशा भरी दृष्टि से देख ये लगता है कि बादल बरसने वाले हैं, लेकिन किसानों के चेहरे पर उभर रही चिन्ता की रेखाओं से उन्हें कतई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा है। हालांकि किसानों का मानना है कि आषाढ़ माह समापन की ओर है यदि अब भी मुसलधार वर्षा होगी तो धान रोपनी की जा सकेगी।
 
8 जुलाई के बाद पाकुड़िया में 10 की संध्या के 4 बजे 28.4 मिली मीटर वर्षा हुई है। यद्यपि किसानों का मानना है कि निचली भूमि में जल है वहीं धान के बीज फिलहाल नहीं बढ़ने से रोपनी नहीं हो पायेगी। प्रखण्ड के प्रसिद्ध कृषक एवम पूर्व शिक्षक अमरेन्द्र घोष उर्फ़ सट्टू घोष ने वर्षा व धान रोपनी के सम्बन्ध में मंगलवार को पूछने पर कहा कि बुधवार को बारिश होने से बीज को लाभ होगा। लेकिन धान रोपनी के लिए तथा धान फसल के लिए और पानी की आवश्यकता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि वर्षा की जरुरत है पर रोपनी में देर होने से धान की फसल कम होने की सम्भावना बनी रहती है।
 
किसानों ने बताया कि फिलहाल खाली पड़ी अन्य भूमि पर अरहर, मकई आदि फसल लगाई जायेगी। यदि भारी बारिश होगी तो बीज तैयार होत ही धान की रोपनी में तेजी आयेगी। फिलहाल किसान आशान्वित हैं कि वर्षा होगी और धान की रोपनी भी की जायेगी। 

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