73वां संविधान संशोधन

साधारण जन से असाधारण शासन तक: पंचायती राज की नई परिभाषा

जब गाँव की धूल भरी पगडंडी पर बैठा किसान निडर होकर अपनी बात रखता है और उसी स्वर से विकास की दिशा आकार लेने लगती है, तब लोकतंत्र अपनी सबसे जीवंत और वास्तविक पहचान में सामने आता है। 24...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार