समत्व और साधना

सम्यक्त्व के भाव जागृत हों,आत्म-जागरण

मनुष्य जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मा की पहचान और उसके वास्तविक स्वरूप की खोज का माध्यम है। जब तक मनुष्य अपने भीतर छिपे सत्य को नहीं पहचानता, तब तक वह बाहरी संसार में भटकता...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार