शहर सुन न पाए: ध्वनि का अन्याय

सुप्रीम कोर्ट कहे, शहर सुन न पाए: ध्वनि का अन्याय

कृति आरके जैन शहर की रात मानो सोई नहीं, बल्कि दोहरी ज़िंदगी जी रही है। गली-गली में सन्नाटा छाया है, लेकिन वह झूठा है—हर मैरिज गार्डन और कई मोहल्लों/कालोनियों में तेज़ धुनें, डीजे की थाप और लाउडस्पीकर...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार