साइकिल सीख रही नाबालिक से 4 युवकों ने की छेड़छाड़

•जब नाबालिग बच्ची ने लिखित शिकायत दी, तो अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई?

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मलिहाबाद। 
 
मलिहाबाद थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 12 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ चार युवकों ने छेड़छाड़ की घटना कर डाली। इस घटना ने न केवल क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पुलिस की भूमिका को भी कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। जानकारी के अनुसार पीड़िता अपने घर के पास साइकिल चलाना सीख रही थी, तभी मोहल्ले के ही चार युवक एहसान, सूफियान, शालिम और शावेज़ ने उसके साथ छेड़छाड़ कर दी।
 
जब बालिका ने विरोध किया तो आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इस पूरी घटना से डरी-सहमी बच्ची ने अपने परिजनों को जानकारी दी, जिसके बाद परिजन उसे लेकर मलिहाबाद थाने पहुंचे और तहरीर दी। उत्तर प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है।
 
साइकिल सीख रही नाबालिक से 4 युवकों ने की छेड़छाड़
 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बनाए गए एंटी रोमियो स्क्वायड का उद्देश्य था कि महिलाएं और बच्चियां खुद को सुरक्षित महसूस करें। लेकिन इस घटना ने इन दावों की हवा निकाल दी है। दिनदहाड़े एक नाबालिग के साथ छेड़छाड़ और धमकी जैसी गंभीर वारदात से इलाके में दहशत का माहौल है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस प्रशासन पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए काम करता है या फिर आरोपियों को बचाने में जुट जाता है।
 

पुलिस की संदिग्ध भूमिका, दरोगा पर गंभीर आरोप

 
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मलिहाबाद थाने में तैनात दरोगा गौरी शंकर पर गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि दरोगा गौरी शंकर आरोपियों से मिले हुए हैं और वह पैसे के लालच में पीड़ित परिवार पर सुलह-समझौते का दबाव बना रहे हैं। परिजन बताते हैं कि दरोगा लगातार फोन कर या बुलाकर कह रहे हैं कि मामले को रफा-दफा कर लो, अन्यथा इसका अंजाम भुगतना पड़ सकता है। इससे साफ है कि पुलिस की आड़ में दबंगों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
 
अहम सवाल जो प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हैं*
 
•जब नाबालिग बच्ची ने लिखित शिकायत दी, तो अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई?
• क्या पुलिसकर्मी ही अब आरोपी पक्ष के एजेंट बन गए हैं?
• क्या योगी सरकार का एंटी रोमियो स्क्वायड सिर्फ पोस्टर तक सीमित है?
• दरोगा गौरी शंकर पर लगे दबाव के आरोपों की जांच कौन करेगा?
• क्या महिला सुरक्षा केवल चुनावी जुमला बनकर रह गई है?
 
 

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