पाकिस्तानी आतंकियों ने जम्मू काश्मीर में 10 तीर्थ यात्रियों की निर्शंस हत्या कर भारतीय राष्ट्र को बड़ी चुनौती दी है: हिन्दु विचार मंच

पाकिस्तानी आतंकियों ने जम्मू काश्मीर में 10 तीर्थ यात्रियों की निर्शंस हत्या कर भारतीय राष्ट्र को बड़ी चुनौती दी है: हिन्दु विचार मंच

पाकुड़िया/पाकुड़/झारखण्ड:- 9 जून को प्रधान मंत्री एवम अन्य मंत्रियों की शपथ लेने के शुभावसर पर अशुभ पाकिस्तानी आतंकियों ने जम्मू-काश्मीर में तीर्थ यात्रियों की एक बस में ताबड़ तोड़ हमला कर 10 तीर्थ यात्रियों की निर्मम हत्या कर दी। जिसमें बड़ी संख्या में यात्री घायल हुए हैं। बताया जाता है कि 4 दिनोंके भीतर ही इन क्षेत्रों 3 आतंकी हमला कर विशाल भारत की संप्रभुता को आतंकवादियों ने बड़ी चुनौती दी है। यद्यपि हमारे वीर भारतीय जवानों ने सर्च ऑपरेशन करते हुए दो आतंकियों को मार गिराया है इस ऑपरेशन के दौरान एक भारतीय सैनिक भी शहीद हुआ है। 
 
हालांकि,इस घटना पर प्रधानमंत्री सहित विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने दुख जताते हुए मृतक परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। मृतकों के प्रति दुःख तथा पीड़ित परिवारों के लिए संवेदना व्यक्त करना भारतीयों का उच्च संस्कार है, परन्तु भारत का जन्म-जात चिर शत्रु पाकिस्तान को बहुत ही गहरी व पीड़ादायक दण्ड देना भी भारतीय पुरुषार्थी संस्कार है। भारत विश्व का अति प्राचीन राष्ट्र है और इसका घोष वाक्य वसुधैव कुटुम्बकम् है। सृष्टि काल से यदि आर्य्यावर्त्त के अतीत की गहराई पर दृष्टि डालते हुए गम्भीर मंथन करने से विदित होता है कि भारत वर्ष के किसी चक्रवर्ती राजाओं ने अकारण किसी ही किसी देश पर आक्रमण नहीं किया है।राष्ट्र रामधारी दिनकर ने भी कहा था, सम्भवतः भारत पर चीनी आक्रमण के समय क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो। 
 
 
आर्य्यावर्त्त के अति शक्तिशाली राजा-महराजाओं ने शरण में शरणगत को क्षमा दान देकर यह सिद्ध किया कि क्षमा वीर-महावीरों का आभूषण है। 10वीं शताब्दी पर दृष्टि डालने पर प्रतीत होगा कि मोहम्मद गौरी ने भारत पर 17 बार सम्पदा लुटने हेतु चढ़ाई की पर राजा पृथ्वी राज ने उसे क्षमा कर दिया और वह पुनः भारत पर चढ़ाई कर भरपूर सम्पदा लुट कर सोमनाथ मंदिर को भारी क्षति पहुंचाई तथा पृथ्वीराज को बंदी बनाकर आंखें फोड़ दी, और उन्हें अफगानीस्तान ले गया। हालांकि आंखें नहीं होने पर भी पृथ्वीराज ने तमाशा दिखाने के बहाने तीर धनुष मांगा और कुछ दुरी पर सिंहासन पर बैठे मोहम्मद गोरी को शब्द वेदी वाण चला कर उसकी हत्या तत्क्षण कर इस वाक्य की सार्थकता सिद्ध कर दी कि भारतीय संस्कार यदि शरणागत को क्षमा दान देना धर्म-कर्म है तो भारतीय राष्ट्र पर आक्रमण करना एवम अमानवीय अपराध करने पर शत्रुओं को कभी क्षमा नहीं किया और कठोर दण्ड देने में कतई संकोच नहीं किया। 
 
लेकिन इन दिनों भारत वर्ष ऐसे राष्ट्र में राजनैतिक परिपक्वता के साथ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है जिसमें पाकिस्तान ऐसे चिर शत्रु देश से बात चीत करने और मित्रता बढ़ाने की बात काश्मीरी नेताओं द्वारा कही जाती रही है। इन दिनों फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि 370 हटाये जाने के बाद, जम्मू-काश्मीर में आतंकवादी घटनाएँ बढ़ी हैं कहकर क्या यह सिद्ध करना चाह रहे हैं कि 370 हटाना सही नहीं है। यह कहकर ऐसे नेता पाकिस्तानी भारत विरोधी आतंकवादियों का मनोबल ही बढ़ाते रहे हैं।यदि उन्हें लगता है कि आतंकी घटनाएँ बढ़ी  हैं उन्हें भारत सरकार को कोशने के बजाय पाकिस्तान की निन्दा करते हुए यह क्यों नहीं सलाह देते रहे हैं कि भाई तुम आतंकी घटना को बंद कराओ हम भारत सरकार को बात-चीत करने के लिए जारी करेंगे जिससे दोनों देशों के सम्बन्ध होने पर दोनों को लाभ होगा।
 
इस प्रकार कांग्रेसी नेता तो पाकिस्तानी आतंकियों की कड़ी निन्दा नहीं करते उल्टे शत्रु देश का पक्ष लेकर नरेन्द्र मोदी सरकार को गिराने का अनुरोध करते हैं और‌ देश के लोगों ने टीवी चैनलों पर देखा भी पाकिस्तान के एक मंत्री भारत के मतदाताओं से कह रहे हैं कि आप अरविन्द केजरीवाल तथा कांग्रेस पार्टी को वोट देकर न्यायप्रिय और अच्छी सरकार भारत में बनावें। हालाँकि केजरीवाल तो दूरदर्शी नेता हैं उन्होंने ऐसी सलाह से पल्ला झाड़ लिया पर कांग्रेसी नेता चुप रहे। विचार मंच पाकुड़िया इकाई ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार की नीतिगत राष्ट्रीय विकास या राष्ट्र हित के संर्दभ में आलोचना किया जाना विपक्षी नेताओं का लोकतांत्रिक अधिकार है, परन्तु भारतीय हित के विपरीत शत्रु देशों का पक्ष लेना कतई सही नहीं माना जाना चाहिए। कारण कि जन्मजात शत्रु कभी सगा नहीं हो सकते और वे कभी भी घात कर सकते हैं। 
 
हिन्दू विचार मंच ने आगे कहा कि पाकिस्तान देश बनते ही कबायलियों के भेष में पाकिस्तानी सेना ने हमला किया।इसके बाद 1965 में तथा वाजपेयी सरकार ने पाकिस्तान से सम्बन्ध बनाने के क्रम में।उदारता दिखाते हुए कहा कि मित्र बदले जा सकते हैं पर पड़ोसी नहीं और अवसर पाकर दोस्ती के बदले कारगिल कर अपनी द्वेषपूर्ण नीति, संस्कार का परिचय दे दिया।यद्यपि इस पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ ने स्वेच्छा से स्वीकर करते हुए गलती करना बताया। उमर परिवार किस आधार पर मित्रता का हाथ बढ़ाते हुए बातचीत करने की सलाह भारत सरकार को दे रहे हैं। 9 जून को हुई तीर्थ यात्रियों पर आतंकी हमला से भारत के नागरिकों में गहरा रोष है और उनका मानना है कि पाकिस्तान की सिर्फ निन्दा, आलोचना करने से उसपर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा और चिर शत्रु को गम्भीर आघात पहुंचाना ही भारत का राष्ट्रीय धर्म है। 

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