संजीव-नीl

जो शांति के दे पैगाम,

संजीव-नीl

जो शांति के दे पैगाम,

जो शांति के दे पैगाम,
वक्त में जो काम आए
वह सच्चा मित्र होता है।
साथ साथ जो कंधे
से कंधा मिलाकर
पसीना बहाए,
वह अच्छा मित्र होता है।
मित्र और शत्रु की पहचान
बुरे वक्त में ही होती है।
भारत और रूस की मित्रता
पूरी दुनिया जानती है।
भारत और रूस को
परंपरागत मित्र मानती है।
रूस ने किया निवेदन
भारत को देना होगा
अखंड शांति का प्रतिवेदन।
यदि रूस देश भारत के काम
आया युद्ध के संकट में कभी,
तो भारत का भी फर्ज बनता है
की भारत यूक्रेन विश्व युद्ध की आशंका में भारत
रूस का मनोबल ऊंचा रखने
सदैव साथ दे झंडा ऊंचा रखने,
इस युद्ध की घड़ी में
यूक्रेन और रूस के बीच
मध्यस्थता कर
विश्व शांति का एक
पुनीत संदेश प्रदान करें,
और वैश्विक स्तर पर
अपना कद ऊंचा
और ऊंचा रखें।
युद्ध की भूमिका
सदैव विनाशक होती है,
जनता सदैव रोती है।
अब भारत को
अखंड शांति का
विश्व जगत में संदेश देना होगा।
और समूचे विश्व का नेतृत्व करना होगा।
सच्चे मित्र की यही पहचान,
जो हमेशा शांति के दे पैगामl
संजीव ठाकुर,

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