हर दिन पांच सौ लोगों को निगल लेती है भारतीय सड़कें! 

आखिर सड़कों पर रेंगती मौत का कौन है जिम्मेदार? 

हर दिन पांच सौ लोगों को निगल लेती है भारतीय सड़कें! 

गर्मी की छुट्टियां होते ही देश में पहाड़ी राज्यों की ओर मैदानी क्षेत्रों के निवासियों की पिकनिक व धार्मिक टूर का सिलसिला शुरू हो जाता है। अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवार पहाड़ी क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों पर जाना पसंद करते हैं क्योंकि इससे वह धार्मिक तीर्थयात्रा व पर्यटन दोनों काम एक साथ करने का विचार रखते हैं लेकिन इन दिनों रोजाना धार्मिक यात्रा के दौरान सड़क हादसे और उनमें जनहानि के मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में जम्मू के अखनूर में हुए सड़क हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में 69 लोग घायल हो गए। यह यात्री यूपी के हाथरस से जम्मू संभाग के जिला रियासी के शिवखोड़ी धाम में बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए जा रहे थे। दावा किया जा रहा है कि डोडा में पिछले साल हुए हादसे के बाद यह जम्मू कश्मीर की दूसरी सबसे बड़ी दुर्घटना15 नवंबर 2023 डोडा के अस्सर इलाके में यात्रियों से भरी एक बस सड़क से फिसल कर 300 फुट गहरी खाई में गिर गई थी।
 
इसमें 39 लोगों की मौत हो गई थी और 19 घायल हो गए थे।इसी साल 29 मार्च को रामबन जिले के बैटरी चश्मा इलाके में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग से एक स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहन (एसयूवी) के फिसल कर खाई में गिरने से 10 लोगों की मौत हो गई थी। आपको बता दें कि दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में अत्यधिक वृद्धि हुई है और इनमें से भी प्रत्येक 5 में से 1 मौत भारत में होने के कारण भारत को सड़क दुर्घटनाओं की राजधानी भी कहा जाने लगा है जिनमें परिवारों के परिवार तबाह हो रहे हैं।सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 'भारत में सड़क दुर्घटनाएँ-2022' पर वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की है. इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में कुल 4,61,312 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं जिसमें 1,68,491 लोगों की जान चली गई. जबकि 4,43,366 लोग घायल हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, हर एक घंटे में 53 सड़क हादसे हुए और हर एक घंटे में 19 लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवाई। 
 
 हाल के दिनों में हुई सड़क दुर्घटनाओं की बानगी देखिए 18 मई को मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में केदारनाथ से दर्शन करके लौट रहे श्रद्धालुओं की कार मवेशियों से टकराने से बचाने की कोशिश में पलट जाने से उसमें सवार 2 महिलाओं की मौत व 11 अन्य घायल हो गए।23 मई को मध्य प्रदेश के इंदौर से चारधाम यात्रा के लिए आए तीर्थ यात्रियों की बस समराला के निकट एक ट्राले से टकरा जाने से 2 महिला श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई। 24 मई को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से माता वैष्णो देवी के दर्शनों को जा रहे श्रद्धालुओं की मिनी बस दिल्ली-जम्मू हाईवे पर दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से एक ही परिवार के 7 सदस्यों की मौत और 20 लोग घायल हो गए। 24 मई को ही कर्नाटक के श्रद्धालुओं को लेकर अयोध्या आ रही एक मिनी बस के अयोध्या-प्रयागराज हाईवे पर एक ट्रक से टकरा जाने के कारण तीन श्रद्धालुओं की मौत और 14 घायल हो गए।
 
25 मई को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में एक कार के सड़क से फिसल जाने से पंजाब के 4 पर्यटकों की मौत तथा 3 घायल हो गए।26 मई रात को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के राजसर में एक सड़क दुर्घटना में एक कार और ट्रक की टक्कर में एक दम्पति और उनकी 7 वर्ष की बेटी के अलावा एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई।26 मई को ही उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में सीतापुर से उत्तराखंड में मां पूर्णागिरि के दर्शनों को जा रहे श्रद्धालुओं की बस पर तेज गति से आ रहा डम्पर पलट जाने से 11 श्रद्धालुओं की मौत हो गई।26 मई को ही हिसार के सैक्टर 27-28 मोड़ के निकट ट्रक से बचने के प्रयास में लड़की का रिश्ता करने आए परिवार की कार पलट जाने सेकार सवार दम्पति और 2 भाइयों सहित 5 लोगों की जान चली गई।  28 मई को ही अलमोड़ा में एक सड़क दुर्घटना में रुड़की के एक परिवार के 3 सदस्यों की मृत्यु हो गई।
 
29 मई को उत्तर प्रदेश के गोंडा में भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह के बेटे कर्ण भूषण सिंह के काफिले की एक गाड़ी ने 2 बाईक सवारों को रौंद दिया जिससे दोनों युवकों की मौत हो गई जबकि सड़क के किनारे बैठी एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।29 मई को ही महाराष्ट्र के सांगली जिले में एक कार के नहर में गिर जाने से एक ही परिवार के 6 सदस्यों की मौत हो गई।29 मई को ही फिरोजपुर के कस्बा मक्खू में सड़क पार करते समय एक दुकानदार को एक बस ने टक्कर मार दी जिससे उसकी मृत्यु हो गई।  29 मई को ही दिल्ली में तेज रफ्तार बाईक गीता कालोनी फ्लाईओवर से लगभग 25 फुट नीचे गिर जाने से दो युवकों की मौत हो गई।
 
 अब 30 मई को जम्मू-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चौकी चौरा कालीधार मार्ग पर एक हृदय विदारक दुर्घटना में उत्तर प्रदेश के हाथरस से शिवखोड़ी जा रही तीर्थयात्रियों की स्लीपर बस ड्राईवर द्वारा तीखे मोड़ पर संतुलन न रख पाने के कारण 5-6 पलटियां खाकर 200 फुट की गहरी खाई में गिर जाने से 22 तीर्थ यात्रियों की मौत और 64 तीर्थ यात्री घायल हो गए। निश्चय ही यह दुर्घटनाएं अत्यंत दुखद हैं। इस तरह की दुर्घटनाओं से मरने वालों के परिवारों पर अचानक वज्रपात हो जाता है, इनके चलते अनाथ, विधवा और यतीम हो जाने वाले बच्चों, महिलाओं और बूढ़े माता-पिता का जीवन भी नरक बन जाता है। अतः इनसे बचाव के लिए वाहन चालकों को प्रत्येक स्तर पर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। निस्संदेह, ऐसी बड़ी दुर्घटनाओं के मूल में मानवीय लापरवाही ही होती है।
 
यह विचारणीय तथ्य है कि मैदानी इलाकों से पर्वतीय मार्गो पर बस या अन्य वाहन ले जाने वाले चालकों को क्या पहाड़ी रास्तों पर बस चलाने का पर्याप्त अनुभव होता है? जो तीखे मोड़ पर वाहन को नियंत्रित कर सकें दरअसल, जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के चलते पहाड़ी इलाकों में होने वाली दुर्घटनाओं में मानवीय क्षति ज्यादा होती है। वजह साफ है कि गहरी खाई बचने के मौके कम ही देती हैं। यह विडंबना है कि बड़े हादसों के बाद शासन-प्रशासन की तरफ से मुआवजे व संवेदना का सिलसिला तो चलता है लेकिन हादसों के कारणों की तह तक नहीं जाया जाता। यदि हादसों के कारणों की वास्तविक वजह सार्वजनिक विमर्श में आए तो उससे सबक लेकर सैकड़ों लोगों की जान बचायी जा सकती है।
 
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में करीब डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है। वहीं करीब साढ़े चार लाख लोग इन दुर्घटनाओं में घायल हो जाते हैं। इनमें कई लोग तो जीवन भर के विकलांगता का शिकार हो जाते हैं। आपको बता दें कि भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों का आंकड़ा पूरी दुनिया में तीसरे नंबर पर है। लेकिन इसके बावजूद पूरे देश में नीति-नियंताओं की तरफ से बेमौत मरते लोगों का जीवन बचाने की ईमानदार पहल नहीं होती। हाल के वर्षों में देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गो का विस्तार हुआ। सड़कें चौड़ी और सुविधाजनक हुई। लेकिन रफ्तार का बढ़ना जानलेवा साबित हो रहा है। कहींझकहीं सड़क निर्माण तकनीकी में चूक भी हादसों की वजह बनने की खबरें आई हैं। वहीं बड़ी संख्या में हादसों की वजह अनियंत्रित रफ्तार, यातायात नियमों का उल्लंघन तथा शराब पीकर वाहन चलाना रहा है।
 
यदि दुर्घटनाओं के कारणों में विस्तार से जाएं तो वाहन चलाने के अनुभव के बिना ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करना व ट्रक चालकों की आंखों की नियमित जांच न होना भी सामने आता है। दरअसल, वाहनों की फिटनेस, सार्वजनिक वाहन चालकों के स्वास्थ्य की नियमित जांच तथा निर्धारित समय तक ही वाहन चलाने की अवधि भी तय की जानी चाहिए। कई सर्वेक्षण बताते हैं कि चालक की नींद पूरी न होने और उसे पर्याप्त आराम न मिलने से हादसा हुआ चिंता की बात यह भी है कि लोग रात में सफर करना सुविधाजनक मानने लगे हैं। जबकि रात को वाहन चलाना कई मायनों में असुरक्षित होता है और किसी हादसे के बाद पर्याप्त सहायता व उपचार न मिलना जानलेवा साबित हो सकता है।
 
इन दुर्घटनाओं का दुखद पहलू यह है कि मरने वाले में अधिकांश युवा व परिवार के कमाने वाले सदस्य होते हैं। हादसे के बाद पूरा परिवार गरीबी के दलदल में चला जाता है। यह राष्ट्र की बड़ी आर्थिक क्षति होती है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि यदि भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओ में मरने वाले लोगों की संख्या रोकी जा सके तो देश के सकल घरेलू उत्पाद में तीन फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है। नीति-नियंताओं को इस बात पर भी विचार करना होगा कि दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत में वाहन कम होने के बावजूद सड़क दुर्घटनाएं इतनी बड़ी संख्या में क्यों होती हैं?
 
दुर्घटनाओं के कारणों में सड़कों की खस्ता हालत, खुले मैनहोल, यातायात नियमों का उल्लंघन, शराब पीकर या अनियंत्रित गति से गाड़ी चलाना, लगातार अधिक समय के लिए बिना रुके या बिना पूरी नींद लिए वाहन चलाना शामिल है। अतः इन्हें रोकने के लिए कुछ अवधि के बाद ड्राईवर को आराम दिलाना, उसका मुंह आदि धुलवाना और लम्बी यात्रा के लिए एक अतिरिक्त रिजर्व ड्राईवर साथ लेकर चलना चाहिए।
 
मनोज कुमार अग्रवाल 
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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