चुनाव परिणाम के लिए उत्सुकता बढ़ी

चुनाव परिणाम के लिए उत्सुकता बढ़ी

देश के तमाम एक्जिट पोल ने तीसरी बार लगातार एनडीए की सरकार बनने का अनुमान लगाया है। यह अनुमान ही है क्योंकि कि स्वयं चैनलों के संपादक बीच प्रोग्राम में कहते हैं कि यह एक्जिट पोल हैं एग्जेक्ट पोल नहीं। मतलब यह जरूरी नहीं कि जो एक्जिट पोल में दिखाया गया है परिणाम उसी के अनुसार आयें। लेकिन यह अनुमान है आ भी सकते हैं। विपक्ष इन एक्जिट पोल को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। जब कि एक्जिट पोल जानकर भारतीय जनता पार्टी गदगद है। लेकिन अब जनता और नेता तथा तमाम राजनैतिक विश्लेषक परिणाम जानने को उत्सुक हैं। एक्जिट पोल यदि सही निकले तो ये राजनैतिक विश्लेषक कहेंगे कि देखिए हमने जो कहा था वही हुआ और यदि विपरीत निकले तो यह कहेंगे कि हमने अनुमान लगाया था और हम उसके पास तक पहुंचाने में कामयाब हुए हैं।
 
खैर अब लोगों को एक एक मिनट का सब्र नहीं हो रहा है। मार्केट में चाय की दुकानों पर चर्चा शुरू हो चुकी है। चार जून को हमें एक और सरकार मिल जाएगी जो अगले पांच वर्षों तक देश को चलाएगी। जनता को उम्मीद है कि जो भी सरकार आयेगी वह जनता के हित में काम करेगी। दरअसल एक्जिट पोल की विश्वसनीयता जो भी हो लेकिन यह एक तरह का टीवी कार्यक्रम है जो बहुत सारे दर्शकों को आकर्षित करता है। भारती में चुनाव प्रक्रिया बहुत लंबे समय तक चलती है और उसका सीधा कारण देश की आबादी है। ईवीएम के द्वारा अब चुनाव परिणाम जल्दी आने लगे हैं। अन्यथा बैलेट पेपर के द्वारा जब चुनाव होते थे तब वोटों की गिनती में बहुत समय लगता था। आज भी विपक्षी दल ईवीएम से चुनाव न कराकर बैलेट से ही चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। खैर यह तो एक राजनैतिक मुद्दा है। लेकिन ईवीएम से समय की तो बचत होती है। और इसीलिए एक देश एक चुनाव पर भी मंथन हो रहा है ताकि देश का बहुमूल्य समय बच सके।
 
लोकसभा चुनाव के सभी चरण पूरे हो चुके हैं अब देश जानता चाहता है कि आखिरकार सरकार किसकी बन रही है और लोगों को इसलिए उत्सुकता होती है कि उनको चुनी हुई सरकार से उम्मीद होती है कोई रोजगार की उम्मीद करता है कोई मंहगाई पर लगाम लगने की उम्मीद करता है तो कोई विकास की उम्मीद करता है। उम्मीद हर व्यक्ति को होती है। उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक लोकसभा सीटों वाला राज्य है और यहां के परिणाम पर लोगों की खास नजर रहती है। और कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही होकर गुजरता है। मतलब जिसने उत्तर प्रदेश में बढ़त बना ली वही दिल्ली की सरकार बनाता है और यह सच भी है देश 20 प्रतिशत सीटें उत्तर प्रदेश में ही हैं। पिछले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की अच्छी खासी पकड़ उत्तर प्रदेश में रही है। और इस लोकसभा चुनाव में भी एक्जिट पोल लगभग उतनी ही सीटें भारतीय जनता पार्टी को दे रहे हैं। उसमें थोड़ा सा अंतर यह आया है कि जो 10 सीटें बहुजन समाज पार्टी के पास थीं वह समाजवादी पार्टी की तरफ शिफ्ट होती दिखाई दे रही हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सीटें पिछले बार की तरह ही रहने की उम्मीद एक्जिट पोल में दिखाई जा रही है।
 
हर एक्जिट पोल का यदि औसत निकाला जाऐ तो भारतीय जनता पार्टी को 350 सीटों के आसपास मिलती दिख रहीं हैं। ऐसे में एक बड़ा प्रश्न यह है कि जो राजनैतिक विश्लेषक पहले यह बोल रहे थे कि इस बार मतदाता बहुत शांत है और इसलिए यहां एनडीए काफी नीचे आ सकता है। उनका यह अनुमान कहां गया। एक टीवी चैनल पर जाने माने राजनैतिक विश्लेषक अभय दुबे का मानना यह है कि जब मतदाता शांत होता है तो परिणाम रिपीट करते हैं यदि परिणाम एक्जिट पोल के हिसाब से आ रहे हैं। केवल प्रशांत किशोर ने यह घोषणा की थी कि एनडीए 350 सीटों के आसपास ही ठहरेगा। और इस पर काफी चर्चा हुई थी। योगेन्द्र यादव का गणित अलग था और उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी अकेले 250 से 272 के आसपास तक ठहरेगी। यदि एक्जिट पोल सर्वे सही साबित हुए तो योगेन्द्र यादव का गणित फेल हो जाएगा और प्रशांत किशोर की भविष्यवाणी सही साबित होगी।
 
बरहाल आरोप प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो चुकी है। और यह आरोप प्रत्यारोप मतगणना के कुछ दिन बाद तक चलेंगे और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा। आखिर बाद में सब कुछ जनता को ही करना है। लेकिन यह बात सत्य है कि चुनाव को लेकर अब लोगों में उत्साह धीरे धीरे कम होता जा रहा है। पहले समय यह था कि हर नुक्कड़ पर चाय की दुकानें हुआ करतीं थीं और वहीं पर सारी राजनीतिक चर्चाएं होती थीं। बड़े-बड़े विद्वान,  राजनैतिज्ञ, लेखक, शिक्षक और पत्रकार वहीं पर मिल जाते थे और चुनाव की चर्चा हो जाती थी। लेकिन अब समय में काफी परिवर्तन हुआ है। चाय की दुकानें बंद हो गईं हैं और जो हैं भी वहां दुकानदार बैठने के लिए बैंच तक नहीं डालता है ताकि वहां भीड़ लगे।
 
पहले सही जानकारी चौराहों पर ही मिलती थी लेकिन अब हर घर में साधन हैं और टीवी चैनल वाले दिन भर चर्चा किए ही रहते हैं। अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए एक से एक मजेदार समाचार के प्रोग्राम लेकर आते हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा जनता को अट्रैक्ट कर सकें। खेमेबाजी पहले भी थी और आज भी है। मीडिया भी दो भागों में बंटा हुआ है। एक भाग टीवी पर है तो दूसरा भाग यूट्यूब पर आ गया है। जनता दोनों संसाधनों से कार्यक्रमों को देखती है। समय के साथ साथ अब प्रतिद्वंदिता और अधिक बढ़ चुकी है। लेकिन यह प्रतिद्वंदिता हकीकत से परे है। हर व्यक्ति आज समझदार है लेकिन वह ज्ञान से परिपूर्ण नहीं है। खैर अब ज्यादा समय नहीं बचा है 4 जून की दोपहर तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि किसकी सरकार बनने जा रही है।
 
जितेन्द्र सिंह पत्रकार  
 
 

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