बैंक मैनेजर के कारनामें से खाताधारक त्रस्त।

बैंक मैनेजर के कारनामें से खाताधारक त्रस्त।

स्वीकृत लोन पर 10% घूस की मांग की तब जाकर लोन स्वीकृत किया।


संतोष तिवारी (रिपोर्टर)

भदोही।

 सरकार जहां आम आदमी को रोजगार देने के लिए विभिन्न तरह की योजनाएं संचालित कर रही है वही सरकार के ही नुमाइंदे सरकार की योजनाओं में पलीता लगाने से बाज नही आ रहे है। जिससे आम आदमी को काफी परेशानी होती है। कही कही ऐसा भी मामला देखने को मिलता है जहां केवल अपने स्वार्थ और सुविधा शुल्क के चक्कर में परेशान व्यक्ति के हितों को ध्यान नही देते है। एक ऐसा ही मामला गोपीगंज क्षेत्र के कौलापुर में स्थित यूनियन बैंक में देखने को मिला जहां पर बैंक मैनेजर के कारनामे से खाताधारक बेरासपुर निवासी विमल पाण्डेय त्रस्त है। बेरासपुर निवासी विमल पाण्डेय ने आरोप लगाया कि यूनियन बैंक में उनका का पहले से ही बचत खाता था। और मुद्रा लोन के लिए वह बैंक मैनेजर से मिले और एक माह के अंदर उनका लोन भी स्वीकृत हो गया। और इसी दौरान बैंक मैनेजर ने विमल पाण्डेय से स्वीकृत लोन पर 10% घूस की मांग की तब जाकर लोन स्वीकृत किया।

 विमल पाण्डेय द्वारा बैंक मैनेजर को घूस न देने पर बैंक मैनेजर ने खाता को ही बंद कर दिया। खाता चालू कराने के लिए विमल पाण्डेय कई बार बैंक का चक्कर लगाते रहे। बैंक में जाने पर पैसे को लेकर मैनेजर ने विमल पाण्डेय से अभद्रता भी की। विमल पाण्डेय द्वारा घूस न देने पर बैंक मैनेजर खुद विमल पाण्डेय के घर पर पैसे की मांग करने के लिए पहुंच गये। और उस समय मैनेजर ने उनका बचत खाता बंद करने की बात भी मानी। मैनेजर द्वारा मनमानी ढंग से खाता बंद कर देने पर विमल पाण्डेय ने बताया कि वह अपने लोन का किस्त न भर सके जबकि उनके खाते में पैसा था और बाद में विमल के लोन पर बिलम्ब शुल्क भी चार्ज किया गया। अब यहां सवाल उठता है कि यदि ऐसे ही सरकार की योजनाओं में जिम्मेदार लोग सुविधा शुल्क के चक्कर में ऐसा कार्य करेंगे तो सरकार की योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक कैसे पहुंच पायेगा। ऐसे ही मामलों की वजह से लोग बैंकों से ऋण लेने से कतराते है क्योकि उनको बैंक लोन के साथ साथ सुविधा शुल्क भी देना पड जाता है जो कही न कही उनके लिए महंगा साबित होता है। और इसी वजह से सरकार की योजना सही लोगो तक नही पहुंच पाती है।
 

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