मजदूर सुरक्षा

मजदूर: शहरों का ढांचा बुनने वाले, फिर भी हाशिए पर खड़े सपने

भोर की पहली किरण जब शहर की नींद पर धीरे से दस्तक देती है, उसी समय किसी निर्माण स्थल पर हथौड़े की चोटें नए कल की नींव रखने लगती हैं।  यह ध्वनि केवल पत्थर नहीं तराशती, बल्कि उस...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

कानून हैं, योजनाएं हैं, फिर भी सीवर में मौतें — आखिर जिम्मेदार कौन?

शहरों की चमक जब स्वच्छता के दावों से आत्ममुग्ध होकर दमकती है, उसी क्षण उसी चमक के भीतर छिपा अंधकार चुपचाप इंसानी जिंदगियों को निगलता चला जाता है।  मार्च 2026 की शुरुआत में स्वच्छता के शिखर पर खड़े इंदौर...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय