आध्यात्म और विज्ञान

परंपरा और आधुनिकता के बीच त्रिशंकु बना समाज

वर्तमान समय का मनुष्य एक विचित्र द्वंद्व में जी रहा है। आधुनिकता की अंधी दौड़ में वह इतनी तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है कि उसकी अपनी सनातनी परंपराएँ धीरे-धीरे धुंधलाने लगी हैं। परिणामस्वरूप वह न पूर्णतः आधुनिक बन...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार