मनरेगा में भ्रष्टाचार पर सख्त रुख: लातेहार में झामुमो नेता सौरभ श्रीवास्तव का बड़ा खुलासा, दोषियों पर कार्रवाई की चेतावनी 

मनरेगा में भ्रष्टाचार पर सख्त रुख: लातेहार में झामुमो नेता सौरभ श्रीवास्तव का बड़ा खुलासा, दोषियों पर कार्रवाई की चेतावनी 

लातेहार, झारखंड:- अबुआ सरकार में मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। योजनाओं को पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अधिकारी एवं मनरेगाकर्मियों को ईमानदारी से कार्य करना होगा। उक्त बातें सामाजिक कार्यकर्ता एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेता सौरभ श्रीवास्तव ने कही। शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को लातेहार जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सौरभ श्रीवास्तव ने जिले सहित राज्य स्तर पर मनरेगा में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार को लेकर कई गंभीर खुलासे किए।
 
प्रेस वार्ता के दौरान सौरभ ने कहा कि मकर संक्रांति के अवसर पर भाजपा के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा राज्य सरकार पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। लातेहार में मनरेगा से जुड़े मामलों पर आयोजित यह प्रेस वार्ता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली अबुआ सरकार मनरेगा को पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
 
उन्होंने दावा किया कि उनके संज्ञान में आया है कि राज्य के 55 जिलों में करीब 302 करोड़ रुपये का बड़ा मनरेगा घोटाला सामने आया है। सौरभ ने बताया कि लातेहार जिले की मोंगर एवं सीसी पंचायतों में 600 टीसीबी योजनाएं स्वीकृत थीं, लेकिन इनमें से 10 प्रतिशत भी पूर्ण नहीं हो सकी। इसके बावजूद कई योजनाओं में भूमिहीनों के नाम पर राशि की निकासी कर ली गई, जो गंभीर जांच का विषय है।
 
सौरभ श्रीवास्तव ने गारू प्रखंड के कूटाम पंचायत का उल्लेख करते हुए कहा कि लातेहार के रहने वाले कामिल हुसैन, सोमन प्रवीण, मासूम प्रवीण सहित कई ऐसे लोगों के नाम मनरेगा लाभुक सूची में दर्ज पाए गए हैं, जिन पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा में कार्यरत संविदा कर्मियों एवं इससे जुड़े लोगों की संपत्तियों में असामान्य वृद्धि भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। इस संबंध में उन्होंने एसीबी एवं ईडी को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
 
एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए सौरभ ने कहा कि सीसी पंचायत में सोनू कुमार, जो पिछले वर्ष मई से जुलाई तक जेल में बंद थे, उनके नाम पर भी मनरेगा की राशि की निकासी की गई, जो पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने चंदवा प्रखंड का भी जिक्र करते हुए बताया कि वहां के डाकघरकर्मी मनीष कुमार पर झामुमो प्रखंड अध्यक्ष मनोज चौधरी द्वारा उपायुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया गया था कि मनोज मुंडा, सोमा मुंडा एवं तारा देवी के नाम से फर्जी खाते खोलकर राशि की निकासी की गई।
 
मनरेगा वेंडरों पर सवाल उठाते हुए सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि जिले में कई ऐसे वेंडर पंजीकृत हैं, जिनके पास न तो दुकान है और न ही कोई स्टॉक, फिर भी फर्जी बिलों के माध्यम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की जा रही है। इस मामले में भी वे जल्द एसीबी से जांच की मांग करेंगे।
 
उन्होंने कहा कि फर्जी जॉब कार्ड, बिचौलियों की सक्रियता और योजनाओं का धरातल पर नहीं उतरना मनरेगा की सबसे बड़ी समस्या है। सौरभ ने जानकारी दी कि उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के तहत उपविकास आयुक्त एवं सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों से मनरेगा से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं मांगी हैं। सूचना प्राप्त होने के बाद वे पुनः प्रेस वार्ता कर तथ्य सामने लाएंगे और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित कराने का प्रयास करेंगे।
 
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली लोकप्रिय अबुआ सरकार आने वाले दिनों में मनरेगा को जमीन पर प्रभावी ढंग से उतारने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। झामुमो की पूरी टीम यह सुनिश्चित करेगी कि लातेहार जिले के जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले गरीब आदिवासी परिवारों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचे।

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