हाथी के दन्त और कांग्रेस के सिद्धांत दोनों दो तरह के होते है – विवेकानन्द मिश्र

हाथी के दन्त और कांग्रेस के सिद्धांत दोनों दो तरह के होते है – विवेकानन्द मिश्र

बस्ती। भारत के इतिहास में हर साल एक ऐसी तारीख आती है जिसके आने से हमें उन काले दिनों की याद आ ही जाती है। जिसे हम भूलने की कोशिश तो करते हैं लेकिन भूल नहीं पाते हैं। उन्हीं काली तारीखों में एक तारीख है 25 जून साल 1975 में देश के पीएम पद पर इंदिरा गांधी आसीन थी। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे फैसले भी लिए जिसका उल्लेख इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज है। 50 साल पहले यानि कि 25 जून 1975 की रात पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक फैसले ने ना केवल इतिहास के पन्नों पर छाप छोड़ा बल्कि उसका खामिजा पूरे देश की जनता को उठाना पड़ा।
 
मंगलवार को भाजपा कार्यालय पर आयोजित संगोष्ठी में लोकतन्त्र सेनानी दादा विजय सेन सिंह, बृजेश कुमार अग्रवाल, प्रेम नारायण आजाद, रशीद अहमद, राजेंद्र गौड़, व माता प्रसाद पाण्डेय को अंग वस्त्र भेट कर सम्मानित किया गया। जिलाध्यक्ष विवेकानन्द मिश्र ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्य अतिथि क्षेत्रीय उपाध्यक्ष संजीव राय सहित सभी अतिथियों का अभिवादन किया।क्षेत्रीय उपाध्यक्ष संजीव राय ने अपने उद्बोधन की शुरुआत करते हुये सर्वप्रथम उनलोगों को श्रद्धा-सुमन अर्पित किया जिन्होंने आपातकाल की मानसिकता के खिलाफ संघर्ष किया था और 1975-1977 के दौरान यातनाएं झेलीं थी।
 
उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों ने उस नाजुक मोड़ पर देश के लोकतंत्र को न केवल बचाया वरन लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत किया तथा यह सुनिश्चित किया कि सालों साल तक किसी की हिम्मत न हो सके फिर से ऐसा दुस्साहस करने की। श्री राय ने कहा की उनका बलिदान आने वाली कई पीढ़ियों के लिए वंदनीय है।
 
जिलाध्यक्ष विवेकानन्द मिश्र ने आपातकाल की पृष्ठभूमि की चर्चा करते हुये कहा कि इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही कांग्रेस में सिंडिकेट युग की शुरुआत हो गई और अंततः कांग्रेस के दो टुकड़े हो गये।  उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि उस वक्त कांग्रेस के असंतुष्टों को पार्टी नहीं छोड़नी चाहिये थी, उन्हें पार्टी के अंदर रहते हुये संघर्ष करना चाहिए था ताकि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत बनी रहती। उन लोगों के पार्टी छोड़ने से सत्ता और संगठन की सारी बागडोर इंदिरा गांधी के हाथों में आ गई और वह निरंकुश और तानाशाह हो गई और उसका ही परिणाम था कि देश को आपातकाल जैसी वीभत्स परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। 
 
इस मौके पर यशकांत सिंह, राम श्रिंगार ओझा, रघुनाथ सिंह, राम चरन चौधरी, चन्द्रशेखर मुन्ना, अभिषेक कुमार, राकेश शर्मा, अभिनव उपाध्याय, अश्वनी उपाध्याय, जटा शंकर शुक्ल, केके सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, अमृत कुमार वर्मा, गजेन्द्र सिंह, मनमोहन श्रीवास्तव काजू, अलोक पाण्डेय, अवनीश सिंह, अखिलेश शुक्ल, अंकित पाण्डेय, सतेन्द्र सिंह भोलू, श्रुति कुमार अग्रहरी, रवि तिवारी, प्रेम प्रकाश चौधरी, प्रमोद कन्नौजिया, नीरज पाण्डेय, गजेन्द्र मणि त्रिपाठी, अजीत शुक्ल, अरविन्द श्रीवास्तव, गौरव मणि त्रिपाठी, गौरव अग्रवाल, अभिषेक सिंह,  आदि मौजूद रहे।

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