लाइफ सेवर की कोई सुरक्षा नहीं, शहर में अवैध स्वीमिंग पूलों की भरमार, प्रशासन बेखबर

लाइफ सेवर की कोई सुरक्षा नहीं, शहर में अवैध स्वीमिंग पूलों की भरमार, प्रशासन बेखबर

धर्मेन्द्र राघव

अलीगढ़,। गर्मी में अगर आप स्वीमिंग पूल जाने का प्लान बना रहे हैं तो सावधानी बरतें। क्योंकि शहर के आसपास एरिया में अवैध स्वीमिंग पूल्स की भरमार सी हो गई है। खेतों, हाइवे किनारे और प्लॉटस में बनाए गए इन स्वीमिंग पूल्स में लाइफ सेवर की भी कोई सुरक्षा नहीं है। न ही इनके कोई मानक रखे हैं। मनमाने ढंग से बनाए गए इन स्वीमिंग पूल में नहाने जाने से हर वर्ष कई दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। इसके बाद प्रशासन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति कर अपना पल्ला झाड़ लेता है। यह ही कारण है कि शहर के आउटर एरिया से तहसील तक इस तरह के स्वीमिंग पूल का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। ये जोखिम के पूल आम लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। अवैध स्वीमिंग पूल मामले में डीएम से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठ सका।

एनओसी लेने वालों ने भी जमा नहीं की है क्रीड़ा विभाग में फीस
गर्मी आते ही शहर में करीब एक दर्जन स्विमिंग पूल सक्रिय हो गए हैं। यहां न मानक पूरे हैं और न ही नियमों का ही पालन हो रहा है। जिन स्विमिंग पूल संचालकों ने एनओसी ली भी है, उन्होंने क्रीड़ा विभाग में निर्धारित फीस जमा नहीं की है। यह अवैध तरीके से संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में अगर कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
शहर में ही करीब एक दर्जन स्वीमिंग पूल संचालित किए जा रहे हैं। जिला क्रीड़ा अधिकारी रामिलन के अनुसार, शासन के आदेश के अनुसार, प्रत्येक स्विमिंग पूल संचालक को प्रत्येक साल पूल संचालन से पहले सरकार के खाते में फीस जमा करनी होती है। उसकी बाकायदा रसीद भी मिलती है। इसके बाद स्विमिंग पूल संचालक को निरीक्षण के लिए समय अवधि दी जाती है। उस बीच में टीम मौके पर जाकर यथास्थिति का जायजा लेती है। ओके की रिपोर्ट आने पर ही पूल का संचालन किया जाता है, लेकिन शहर में अब तक एक भी स्विमिंग पूल संचालक द्वारा शासनादेश के मुताबिक कोई फीस जमा नहीं की गई है। ऐसे में कोई भी स्विमिंग पूल वैध नहीं है।

इन जगहों से लेनी होती है एनओसी
स्विमिंग पूल संचालन के लिए मनोरंजन कार्यालय से लेकर फायर ब्रिगेड व पुलिस कार्यालय से एनओसी लेनी होती है। इसके साथ ही जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में शासनादेश के अनुसार निर्धारित फीस को प्रति साल जमा करना होता है। उसके बाद में पूल संचालन की अनुमति मिली है, लेकिन शहर में बिना अनुमति के स्विमिंग पूल का संचालन हो रहा है।कुछ लोग ले देकर पुलिस और फायर की एनओसी तो लेते हैं लेकिन बाकी औपचारिकता किसी की पूरी नहीं होती।

बिना मानक किया जा रहा है संचालन
- खेल निदेशालय से पूल का संचालन शुरू करने से पूर्व अनुमति लेनी जरूरी है।
- स्विमिंग पूल में आपातकाल स्थिति के लिए दो लाइफ जैकेट का होना जरूरी है।
- स्विमिंग पूल में दो ऑक्सीजन सिलिंडर, दो कृत्रिम सांस यंत्र भी होने चाहिए।
- पूल में फिल्टर प्लांट होना चाहिए, जो प्रत्येक दिन चार घंटे चलाया जाए।
- स्विमिंग पूल चलाने के लिए सबसे पहले स्विमिंग कोच जो राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय खिलाड़ी हो, उसकी जरूरत होती है।
- प्रत्येक स्विमिंग पूल के लिए दो लाइफ गार्ड, जो भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा प्रमाणित हों, उनका होना जरूरी होता है।

इनका कहना है..
इस सबंध में जिला क्रीड़ा अधिकारी राममिलन ने बताया कि शासन के आदेश के अनुसार, प्रत्येक स्विमिंग पूल संचालक को जिला क्रीड़ा विभाग में प्रत्येक साल 15 हजार रुपये सरकार के खाते में जमा करने होते हैं। वह जमा होने के बाद में विभाग द्वारा संबंधित व्यक्ति को रसीद दी जाएगी। उसके बाद ही विभागीय टीम मौके पर जाकर स्विमिंग पूल का निरीक्षण करती है। ओके की रिपोर्ट मिलने के उपरांत ही पूल का संचालन किया जा सकता है, लेकिन अब तक किसी ने भी सरकारी फीस जमा नहीं की है। ऐसे में सभी पूल अवैध हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट रमाशंकर का कहना है कि शहर में जो भी अवैध रूप से स्विमिंग पूल संचालित हैं सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कोई भी पूल बिना नियम के संचालित नहीं होगा। इनके खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

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