भाजपा की किस्ती यूपी में डूबी जहां पानी कम था , अब गठबंधन की बैसाखी पर चलेगी मोदी सरकार

भाजपा की किस्ती यूपी में डूबी जहां पानी कम था , अब गठबंधन की बैसाखी पर चलेगी मोदी सरकार

स्वतंत्र प्रभात।एसडी सेठी।

देश में भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपने बूते  हैट्रिक तो नहीं लग पाई है, लेकिन गठबंधन के दलों की बैसाखी पर आ टिके पीएम मोदी के चार सौ पार के नारे के हवाई गुब्बारे की हवा जरूर निकल गई है। अयोध्या के राम मंदिर, धारा 370, हाई वे निर्माण और एयरपोर्ट,फ्री राशन,की जगह मतदाताओ ने मंहगाई, बेरोजगारी , को मुद्दा बनाकर पीएम को गठबंधन के सहारे ही अब  वन मैन शौ का तंबू जरूर उखाड  दिया है।जनमत ने  लोकतंत्र की स्थापना का नमूना पेश कर मैन पावर के स्थान पर जन पावर को प्रमुखता देकर एक मजबूत विपक्ष को भी सामने ला खडा कर सही मायनों में लोकतंत्र की स्थापना कर दी है। कहा जाता है कि जब इंसान में हम की जगह मैं ही सब कुछ का गुणगान होने लगे तो समझ लें की पतन निश्चित है।

यहां भी पीएम मोदी के नाम की तुलना रामायण में श्रीराम को समुद्र पर पुल बनाने के लिए राम नाम लिखकर पत्थर तैराने और  लोकसभा चुनाव में मोदी नाम ब्रांड बन गया था। यानि हर अयोग्य कैंडीडेट भी मोदी के नाम पर लोकसभा की वैतरनी पार करने के सपने देखने लगे। लेकिन मोदी के नाम को मतदाता ने इज्जत तो दी पर  अच्छे से भांपा और धूल चटा दी। ऐसे ही  लोकसभा मतदाताओ ने राम मंदिर, से लेकर मोदी के नाम की झूठी माला  फेरने वालों से उनकी शक्ति को हर लिया। ये ही नजारा उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर देखने को मिला।यूपी में भाजपा की 80 सीटों में से 39  , वहीं पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से सिर्फ 12 सीटे ही मिल सकी। इसी तरह हरियाणा की 10 सीटों में से पांच  और महाराष्ट्र से भी झटका लगा है।

उल्लेखनीय है की 1994 से पहले का चुनाव इंडिया शाईनिंग के नारे पर सवार होकर जीतने की उम्मीद में बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में अबकी बार 400 पार का नारा देकर अपने कार्यकर्ताओ को जमीन पर उतारा। लेकिन  सूत्रों की माने तो नाराज कार्यकर्ताओ और आर एस एस के स्वयं सेवक की जमात तक मतदाताओ के बीच नहीं उतरी। वहीं सोशल मिडिया में वाटस एप के जरिए अबकी पार चार सौ पार के मैसेज भेजकर आराम से सौ गए, और मोदी के नाम पर वैतरनी पार तो हो ही जाएगी।  सबको लगा  कि ऐकले मोदी के नाम पर मतदाता फूल पर अपनी ऊंगली दबा देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

समझदार मतदाता ने भी इस स्थिति को भांपा और अपनी जन पावर का बेहतर इस्तेमाल कर सत्ताधारी पार्टी को घुटने पर लाने को मजबूर कर दिया। अब सत्ताधारी पार्टी की ये हालत है कि वह अपने गठबंधन के दल साथियों की चिरोरियां करने पर मजबूर है। अगर वह वक्त की नजाकत को देखते हुए गठबंधन के साथियों के आगे नहीं झुकेगा तो सामने इंडी गठबंधन भी अपने साथ ले जाने को तैयार है। फिलहाल साथी गठबंधन को साथ लेकर भारतीय जनता पार्टी मजबूरी में सरकार बनाने को तैयार हो गई है।

क्योंकि बीजेपी अपने बूते पर बहुमत का जादुई आंकड़ा 272 तक न पहुंच कर 245 के आस-पास ही पहुंच पाई है। अब देखना यह है कि भाजपा का एनडीए की गांठ कब तक महफूज रख पाएगी?ये तो वक्त बताएगा। बहरहाल भाजपा नीत गठबंधन सरकार बनाने जरूर जा रहा है। लेकिन कब तक ? इसका जवाब तो भविष्य के गर्भ में है।बहरहाल ये पब्लिक है सब जानती है।

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