जीवन में अधिक प्रदूषण
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

जीवन में अधिक प्रदूषण तो निरर्थक प्रवृतियों का है

जीवन में अधिक प्रदूषण तो निरर्थक प्रवृतियों का है व्यक्ति दो तरह से प्रवृत होता है सार्थक और निरर्थक । यदि व्यक्ति अपनी सारी प्रवृतियों का सूक्ष्म निरीक्षण करे तो उसे यह समझ में आ जाएगा कि उसकी प्रवृतियों में निरर्थक प्रवृतियों का जमघट भी कम नहीं है। अनावश्यक...
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