‌यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता- रमाशंकर शुक्ला

‌यत्र -नार्यस्तु- पूज्यंते- रमंते- तत्र -देवता- रमाशंकर शुक्ला
‌प्रयाग राज। 
‌ हमारे भारतीय समाज में स्त्रियों के सम्मान की तुलना देवताओं के समान की गई है की गई है जिसका अर्थ होता है जहां पर स्त्रियों का सम्मान होता है, आदर होता है, मान होता है, वहां पर देवता का वास होता है हमारे समाज में दो प्रकार की दृष्टिकोण है एक दृष्टिकोण स्त्रियों को समाज में पुरुषों के समक्ष मान सम्मान दिलाने के पक्ष में है‌ वही दूसरा दृष्टिकोण स्त्रियों को पुरुषों के बराबर अधिकार न दिए जाने का पक्षधर है‌ प्रथम दृष्टिकोण में नारी को शक्ति ज्ञान सुख संपत्ति लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है उसे दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती के रूप में पूज्य मानते हैं तथा स्त्री को पुरुष की अर्धांगिनी मानते हैं
‌ और दूसरे दृष्टिकोण में स्त्री को पुरुष से निम्न दर्जे का समझा जाता है यदि वास्तव में आज के आधुनिक समाज में नारी को उच्च स्थान प्राप्त है या नारी का वास्तविक रूप से हम लोग महत्वपूर्ण स्थान देते हैं तो नारी के प्रति किसी भी प्रकार का अपराध अत्याचार दुराचार बलात्कार एवं हिंसा नहीं होनी चाहिए लेकिन दूसरी विचारधारा वाले लोग नारी को समाज में पुरुषों के समान अधिकार दिए जाने का विरोध करती हैं इसी कारण से समाज में नारी को उत्पीड़ित किया जाता है तथा बलात्कार और हिंसा जैसी घटनाएं समाज में बढ़ रही हैं आज 21वीं सदी में भी हमारी बहन बेटी बहुओं को दहेज प्रथा पैसे के खातिर उनकी हत्या बलात्कार और जलाए जाने जैसी तमाम घटनाएं देखने को मिलती है नारी के प्रति किए जाने वाले दुर्व्यवहार एवं अपराध को देखकर केवल नारी की विवशता सुनने और देखने को मिलती है और मैथिलीशरण गुप्त जी की यह पत्ती पीड़ित शोषित वंचित तबके की महिलाओं के लिए सही सिद्ध हो रही है
नारी जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी
 आंचल में दूध और आंखों में पानी
‌महिलाओं के प्रति हिंसा से तात्पर्य है कि महिलाओं के निकट संबंधियों, रिश्तेदारों जैसे माता-पिता, भाई-बहन सास-ससुर, या परिवार के किसी भी सदस्य या अन्य व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाला हिंसात्मक व्यवहार एवं उत्पीड़न जो नारी को शारीरिक मानसिक आघात पहुंचाता हो से है ‌आजकल महिलाओं के विरुद्ध अनेक प्रकार की हिंसा है समाज में देखने को मिल रही है जैसे दहेज प्रथा को लेकर महिलाओं  से उनके परिवार से पैसे के लिए हिंसात्मक दबाव बनाते हैं
‌ उसी प्रकार से पुरुष सोच रखने वाले औरतों को दबा कर पता कर हिंसात्मक कार्य करते हैं यौन सुख प्राप्ति के लिए भी पुरुषों द्वारा स्त्रियों पर हिंसात्मक व्यवहार दुराचार किया जाता है अनेक पारिवारिक परिस्थितियां भी स्त्रियों के हिंसात्मक स्थिति का कारण बन जाती है
‌महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के कई वर्गीकरण किए गए हैं जैसे सामाजिक हिंसा के द्वारा पुत्रवधू को लड़कियों की भ्रूण हत्या करने के लिए बाध्य किया जाता है दहेज के लिए तंग किया जाता है महिलाओं से छेड़छाड़ एवं स्त्री को संपत्ति में हिस्सा न देना इत्यादि आता है‌ इसी प्रकार घरेलू हिंसा इसमें दहेज संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं घरेलू हिंसा में दहेज को लेकर स्त्रियों को जला दिया जाता है या उनको मार दिया जाता है या उनके साथ लैंगिक दुर्व्यवहार किया जाता है
‌ तीसरा आपराधिक हिंसा बलात्कार और अपहरण की घटनाएं आपराधिक हिंसा में आती है आज के इस समाज में सबसे ज्यादा घटनाएं बलात्कार एवं अपहरण से जुड़ी हुई है
‌महिलाओं में हिंसा के बढ़ने का मुख्य कारण संचार माध्यमों में विशेषकर फिल्म तथा विदेशी चैनलों द्वारा दिखाई जा रही नारी की छवि है इसके अलावा भारत में अनेक कुप्रथा में प्रचलित हैं जिसमें बाल विवाह पर्दा प्रथा विधवा पुनर्विवाह का अभाव आदि प्रमुख कारण भी है इनको प्रथाओं का शिकार महिलाओं को ही होना पड़ता है
‌आजकल महिलाओं पर होने वाले अपराधों का स्वरूप कई प्रकार से देखने को मिल रहा है जैसे अनैतिक व्यापार छेड़छाड़ नारी उत्पीड़न बलात्कार दहेज हत्या भ्रूण हत्या भगा ले जाना वह अपहरण करना घरेलू हिंसा इत्यादि रूप देखने को मिल रहे हैं
‌हमारे समाज में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार दुराचार दुर्व्यवहार बलात्कार जैसी अपराधिक घटनाओं का कारण मुख्य रूप से हमारे संस्कार और नैतिक मूल्यों में गिरावट के कारण हो रही है आज हमारी शिक्षा भी ग्लैमर शिक्षा हो गई है जिस शिक्षा में संस्कार झलकता था आज आधुनिक युग की शिक्षा में कहीं न कहीं संस्कारों की नैतिक मूल्यों की गिरावट आई है जिसके कारण समाज में इस प्रकार की घटनाएं निरंतर बढ़ रही है समाज में स्त्रियों की दुर्दशा हिंसा बढ़ने का एक कारण फिल्म भी है क्योंकि आज की युवा पीढ़ी फिल्मों से ज्यादा जुड़ा और लगाओ रखते हैं और आज आधुनिक युग की फिल्में इस प्रकार से बनाई जा रही है जिसका समाज पर बुरा असर पड़ रहा है और आज के युवा इस प्रकार की फिल्मों को देखकर कि अपने मन मस्तिष्क के विकार को घर में हत्या और बलात्कार में बदल दे रहे हैं
‌अंत में बस हम इतना ही कहना चाह रहे हैं कि अगर आप सब चाहते हैं कि समाज से हत्या बलात्कार चोरी डकैती इस प्रकार की घटनाएं ना हो तो इसके लिए सरकार के साथ साथ हम सब की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम सब अपने बच्चों को अच्छे संस्कार अच्छे संस्कार गुणवान वाली शिक्षा देने का प्रयास करें हमको अपने बच्चों को आज की चकाचौंध से बचाते हुए भविष्य निर्माण में लगाने की जरूरत है यह सरकार की जिम्मेदारी नहीं है यह हम सब भारतीयों की स्वयं की भी जिम्मेदारी है
कि हम अपने परिवार अपने बच्चों का ख्याल ध्यान रखें जिस दिन से ऐसा होने लगेगा निश्चित रूप से हम कह सकते हैं कि हमारे समाज से हत्या बलात्कार लूट इस प्रकार की प्रवृत्ति वाले लोग समाज से दूर भाग जाएंगे और इस प्रकार की घटनाएं बंद हो सकती है लेकिन उसके लिए हम सबको सरकार के साथ जुड़कर की अपने संस्कारों और नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हुए समाज के उत्थान में आगे आकर बढ़ चढ़कर हिस्सा ले कर के अपने घर परिवार और पास पड़ोस की स्त्रियों को सम्मान सत्कार उच्च स्थान देने में सहयोग प्रदान कर देश को एक उन्नत की ओर अग्रसर करें