आखिर क्यों? 17 सितंबर को ही मनाया जाता है विश्वकर्मा पूजा जाने इनका महत्व…?

मान्यता-है-कि-अश्विन-कृष्णपक्ष-की-प्रतिपदा-तिथि-को-भगवान-विश्वकर्मा-का-जन्म-हुआ-था... ?-ऐसे में-सूर्य-के-पारगमन-के-मुताबिक-ही-विश्वकर्मा-पूजा-के-मुहूर्त-को-तय-किया-जाता-है।
मान्यता-है-कि-अश्विन-कृष्णपक्ष-की-प्रतिपदा-तिथि-को-भगवान-विश्वकर्मा-का-जन्म-हुआ-था... ?-ऐसे में-सूर्य-के-पारगमन-के-मुताबिक-ही-विश्वकर्मा-पूजा-के-मुहूर्त-को-तय-किया-जाता-है।

स्वतंत्र प्रभात
अनुप कुमार

बांका(ब्यूरो)!इस जयंती को लेकर कई मान्यताएं प्रसिद्ध हैं। मान्यता है कि अश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि को भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। … ऐसे में सूर्य के पारगमन के मुताबिक ही विश्वकर्मा पूजा के मुहूर्त को तय किया जाता है।

यही कारण है कि विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर को मनाई जाती है। हमारे हिन्दू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का निर्माणकर्ता या शिल्पकार माना जाता है। भगवान विश्वकर्मा को ही विश्व का पहला इंजीनियर भी कहा जाता है।

भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करने के लिए स्नान आदि करके जमीन पर आठ पंखुड़ियों वाला एक कमल बना कर उस पर सतंजा रखना चाहिए।

इसके साथ ही साथ विश्वकर्मा जी को यंत्रों का देवता भी माना जाता है। शास्त्रों में ऐसा भी कहा गया है कि ब्रह्मा जी के निर्देश के मुताबिक ही विश्वकर्मा जी ने इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक और लंका आदि राजधानियों का निर्माण किया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा जी को ब्रह्मा जी के सातवें पुत्र के रूप में भी माना जाता है।


इस तरह से करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा: भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करने के लिए स्नान आदि करके जमीन पर आठ पंखुड़ियों वाला एक कमल बना कर उस पर सतंजा रखना चाहिए। उसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ विश्वकर्मा जी की मूर्ति पर पुष्प आदि चढ़ाकर उनकी पूजा करना चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।


विश्वकर्मा पूजा का महत्व:
ऐसी मान्यता है कि विश्वकर्मा की पूजा करने वाले व्यक्ति को किसी तरह की कोई कमी नहीं रहती है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा से व्यक्ति के व्यापार में वृद्धि होती है और उसकी सभी मनोकामना भी पूर्ण होती है।

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