सवाल पूछे जाने पर नाराज क्यों हुए कोतवाल साहब?

सवाल पूछे जाने पर नाराज क्यों हुए कोतवाल साहब?

गौरव पुरी (रिपोर्टर )

भदोही।

सरकार भले ही पुलिस को सुधारने की बात करती है लेकिन इसके बावजूद भी कुछ पुलिसकर्मी है जो अपने रूतबे के आगे किसी को कुछ नही समझते। और किसी भी मामले में अपने दोष को छिपाने के लिए दूसरों पर दोषारोपण करते है। जबकि हमेशा से सरकार पुलिस को नैतिकता का पाठ पढ़ाने में कोई कसर नही छोड रही।

एक ऐसा मामला शनिवार को भदोही में दिखा जहां पर दो पक्षों में विवाद हो गया था। और मीडिया में खबर चलने पर पुलिस मामले को संभालती नजर आई। जानकारी के मुताबिक भदोही कोतवाली के छेड़ीबीर मोहल्ले में शनिवार की दोपहर दो पक्षों में विवाद हो गया। जिसमें एक महिला को चोट भी आई।

आरोप है कि जब घटना की सूचना पीड़ित परिवार ने स्थानीय कोतवाली में दीे तो भदोही कोतवाल ने पीड़ित को रजपुरा चौकी पर भेज दिया। और घटना के दो घंटे बाद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। और पुलिस द्वारा इतनी देरी करना भी कई सवाल पैदा करता है।

इस घटना की खबर जब मीडिया में चलने लगी तो मामले को भांप कर पुलिस ने दोनों पक्ष से बातचीत कराकर मामला को शांत कराने में जुटी रही। किसी भी मामले को शांत करा देने का कार्य तो पुलिस का सराहनीय है। लेकिन इसी मामले को लेकर जब एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार ने मामले की जानकारी के लिए कोतवाल भदोही को फोन किया

तो कोतवाल ने हंसते हुए मामले को बडा हल्का बताया लेकिन मीडिया में जिस तरह से खबरें चल रही है तो उसी के बाबत पत्रकार ने हंसकर जबाब देने पर कोतवाल से पूछा कि मामला इतना गंभीर है और पीडित के यहां दो घंटे बाद तक न पहुंची पुलिस और आप हंस रहे है। इस पर कोतवाल साहब पत्रकार के बातों से नाराज हो गये और जानकारी न देने की जिद पर अड़े रहे।

फिर किसी तरह कोतवाल ने बताया कि दोनों पक्षों में बातचीत हो गई है। वैसे आपको जो लिखना हो लिख दीजिए। और नाराज कोतवाल ने फोन को काट दिया। अब यहां सवाल पैदा होता है कि कोतवाल साहब सूचना के बाद भी पीडित को रजपुरा चौकी भेज दिये। और उनकी पुलिस मामले को हल्का जानकर दो घंटे तक न पहुंच सकी।

और बाद में मीडिया में पुलिस के बारे खबरे चलने से नाराज कोतवाल साहब ने पहले तो हंसे और फिर हंसकर जबाब देने के बारे में सवाल पूछे जाने पर  नाराज होकर जानकारी न देने की ठान ली और जो लिखना हो लिख देने की भी बात कहकर फोन काट दिया।

आखिर यह कैसी प्रथा है कि सवाल पूछे जाने पर कोतवाल साहब नाराज हो जाते है। आखिर जिम्मेदारो  से न पूछा जाये तो किससे पूछा जाये? और मीडिया का काम तो पूछना ही है। यदि सही जानकारी नही मिलेगी तो गलत जानकारी प्रसारित होगी जो अनुचित है।