क्या है बायो सेफ्टी लैब….

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में तैयार बॉयोसेफ्टी लेवल 3 (बीएसएल-3) लैब की शुरुआत की गई। यह उत्तर प्रदेश की पहली बीएसएल-3 लैब है।

आइये जानते हैं कि क्या होती हैं अलग-अलग लेवल वाली बॉयोसेफ्टी लैब्स…

जैव सुरक्षा स्तर या बॉयोसेफ्टी लेवल (बीएसएल), बायोलॉजिकल बैरियर्स / बायो कन्टेनमेंट की विभिन्न कैटगरी होती है जिसमें कि घातक रोगाणुओं को एक विशेष प्रयोगशाला में अलग-थलग करके पृथक रखा जाता है। संरोधन का यह स्तर बीएसएल -1 के रूप में निम्न श्रेणी से प्रारम्भ होकर बीएसएल-4 के उच्चतम स्तर तक होता है।

यूएसए की संस्था सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) और EU यही कैटगरी फॉलो करते हैं।

BSL-1 : सुरक्षा स्तर जिसमें रोगाणु किसी स्वस्थ मनुष्य को रोग ग्रस्त नहीं करते

BSL-2 : सुरक्षा स्तर जिसमें सुरक्षा कर्मी रोगाणुओं से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं

BSL-3 : सुरक्षा स्तर जिसमें रोगाणु भविष्य में गंभीर एवं घातक रोग उत्पन्न कर सकते हैं

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