बिहार की राजनीति में शोक की लहर, बिहारी स्मिता की पहचान रघुवंश बाबू को दिया श्रद्धांजलि

नई-दिल्ली-में-पूर्व-केंद्रीय-मंत्री-तथा-बिहार-के-राजनीति-के-कद्दावर-नेता-डॉ-रघुवंश-प्रसाद-सिंह-ने-अपनी-अंतिम-सांस-ले-ली-है-रघुवंश-प्रसाद-सिंह-का-नई-दिल्ली-के-एम्स-अस्पताल-में-निधन-हो-गया।
नई-दिल्ली-में-पूर्व-केंद्रीय-मंत्री-तथा-बिहार-के-राजनीति-के-कद्दावर-नेता-डॉ-रघुवंश-प्रसाद-सिंह-ने-अपनी-अंतिम-सांस-ले-ली-है-रघुवंश-प्रसाद-सिंह-का-नई-दिल्ली-के-एम्स-अस्पताल-में-निधन-हो-गया।

– स्वतंत्र प्रभात

(अनुप कुमार की रिपोर्ट)


सीएम नीतीश भी आहत, भेजा शोक पैगाम – स्वतंत्र प्रभात

रघुवंश प्रसाद सिंह का नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया है। जिससे पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। विगत एक सप्ताह से बिहार की मीडिया में सुर्खियों में छाए रघुवंश सिंह की तबीयत खराब हो जाने की वजह से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

मगर आज खबर यह है कि उनका निधन हो गया। उनके निधन पर प्रदेश के सभी बड़े-छोटे राजनेताओं ने शोक व्यक्त किया है। विदित हो की राजद से फिलहाल नाराज चल रहे राजद के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह को तबीयत खराब हो जाने की वजह से।

जनता के बीच के और जमीनी नेता थे रघुवंश (फाईल चित्र) – स्वतंत्र प्रभात
बिहार के विकास के लिए वह सुर, वह अंदाज अब कहां…. – स्वतंत्र प्रभात

नई दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह को कोरोना संक्रमण हुआ था। कुछ दिनों पूर्व ही उन्हें कोरोना से निजात मिला था।

रघुवंश प्रसाद सिंह ने फिलहाल स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से दिल्ली में रह रहे थे।प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। जिसके बाद उन्हें चिकित्सकों की सलाह में आईसीयू में भर्ती किया गया था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे।  राष्‍ट्रीय जनता दल के दिग्‍गज नेता और बिहार के वैशाली क्षेत्र के पूर्व सांसद का जन्‍म 6 जून 1946 को वैशाली के शाहपुर में हुआ था।

डॉ. सिंह ने बिहार यूनिवर्सिटी, मुजफ्फरपुर से गणित में डॉक्‍टरेट की उपाधि प्राप्‍त की थी। वे गणित के प्राध्यापक थे। यहां यह विशेष रुप से उल्लेखनीय है कि डॉ. सिंह ने मुजफ्फरपुर में आयोजित अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के सम्मेलन (2011) में उद्घाटनकर्ता/मुख्य अतिथि के रुप में भाग लिया था।

उन्होंने काफी प्रेरणादायी भाषण दिया था। डॉ. सिंह लोकनायक जयप्रकाश नारायण एवं राम मनोहर लोहिया के अनुयायी थे और राष्ट्रीय जनता दल में उन्हें अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बाद नंबर दो का दर्जा प्राप्त था।

उन्होंने संपूर्ण क्रांति आंदोलन में महती भूमिका निभाई थी। 1973 में उन्‍हें संयुक्‍त सोशलिस्‍ट पार्टी का सचिव बनाया गया। 1977 से 1990 तक वे बिहार राज्‍यसभा के सदस्‍य रहे। 1977 से 1979 तक वे बिहार राज्‍य के ऊर्जा मंत्री रहे।

इसके बाद उन्‍हें लोकदल का अध्‍यक्ष बनाया गया। 1985 से 1990 के दौरान वे लोक लेखांकन समिति के अध्‍यक्ष रहे। 1990 में उन्‍होंने बिहार विधान सभा के सहायक स्‍पीकर का पदभार संभाला।

लोकसभा के सदस्‍य के रूप में उनका पहला कार्यकाल 1996 से प्रारंभ हुआ। वे 1996 के लोकसभा चुनाव में निर्वाचित हुए। उन्‍हें केंद्रीय पशुपालन और डेयरी उद्योग राज्‍यमंत्री बनाया गया। वे 1998 में लोकसभा में दूसरी बार निर्वाचित हुए तथा 1999 में तीसरी बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।

इस कार्यकाल में वे गृह मामलों की समिति के सदस्‍य रहे। 2004 में चौथी बार उन्‍हें लोकसभा सदस्‍य के रूप में चुना गया। 23 मई, 2004 से 2009 तक वे ग्रामीण विकास के केंद्रीय मंत्री रहे। मनरेगा लागू करने में उनकी महती भूमिका रही।

2009 के लोकसभा चुनावों में उन्‍होंने पांचवी बार जीत दर्ज की। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। रामाकिशोर सिंह (लोजपा) को 3,05,450 वोट और डॉ. रघुवंश प्रसाद (राजद) : 2,06,183 वोट मिला। 2019 में वैशाली लोकसभा सीट से लोजपा उम्मीदवार वीणा देवी ने राजद प्रत्याशी डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह को पराजित किया।

वीणा देवी को कुल पांच लाख 61 हजार 139 मत मिले, जबकि राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह को तीन लाख 29 हजार 846 वोट प्राप्त हुए। इस तरह उन्होंने दो लाख 31 हजार 293 मतों के अंतर से जीत हासिल की।

वीणा देवी पहली बार चुनाव लड़ी और भारी मतों से जीत दर्ज की। बहरहाल, यह चुनावी राजनीति के गणितीय आंकड़े हैं। इसमें कभी-कभी रघुवंश बाबू पीछे पड़ गए, लेकिन सिद्धांत एवं नीति क्षेत्र में हमेशा आगे रहे। यही उन्हें अन्य राजनीतिज्ञों से अलग करती है। इस रूप में वे हमेशा याद किए जाएंगे।

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