भले ही इंडिया कृषि क्षेत्र पर आधारित ना हो लेकिन भारत की ज्यादातर जनसंख्या …

भले-ही-इंडिया-कृषि-क्षेत्र-पर-आधारित-ना-हो-लेकिन-भारत-की-ज्यादातर-जनसंख्या ...

अब से करीब 4 महीने पहले 1 फरवरी को वित्त मंत्री सीतारमण ने संसद में बजट पेश किया और उस समय —सीतारमण ने एक कविता का हवाला दिया – प्यारे वतनप्यारे वतन का मतलब अप्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण समुदाय के लिए था । जैसा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू “भारत एक खोज” में लिखते हैं कि भारत क्या है ? तो उन्हें सुनने वाले लोग कहते हैं कि भारत एक राष्ट्र है, एक देश है और भी जाने क्या-क्या कहते हैं ?
लेकिन जवाहरलाल नेहरू उन्हें वही रोकतें हैं और कहते हैं नहीं।भारत इस देश के प्रत्येक तत्व में उपस्थित है यानी मैं स्वयं एक भारत हूँ। आप एक भारत है। यहां की संस्कृति और समाज का प्रत्येक अंग भारतवर्ष का निर्माण करता है। इन्हीं के मिलने से बनता है एक “अखंड भारत”


 अखंड भारत का सपना आजादी से पूर्व भले ही पूरा नहीं हो सका। लेकिन आजादी के बाद भारत वर्ष को अखंड बनाने के लिए जितने प्रयास किए गए वे सराहनीय हैं।  जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री बनते प्रथम पंचवर्षीय योजना के दौरान ग्रामीण विकास पर अत्यधिक बल दिया गया जिसमें कुएं ,नहर ,नदी परियोजनाओं का निर्माण कार्य किया गया। उस समय भारतवर्ष में  भूमिहीन वर्गों के लिए आचार्य विनोबा भावे उनका हक दिलाने की पूरी कोशिश कर रहे थे।मगर यह दुख पूर्ण बात है कि 70 वर्ष बीत जाने के बाद भी हम प्रथम सेक्टर यानी सैक्टर यानी कृषि क्षेत्र को समवर्ती सूची का विषय नहीं बना पाए। कृषि क्षेत्र में विकास बहुत ही मंद गति से हुआ यानी हम कह सकते हैं कि विकास बिल्कुल भी नहीं हुआ।

हां कुछ परियोजनाएं जरूर इसके लिए चलाई गई, लेकिन उनके क्रियान्वयन के लिए  कोई आवश्यक कदम नहीं उठाए गए इसको केवल औपचारिकता के तौर पर ही लिया गया। सन 1990 के दशक में प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह आए उसमें विदेशी निवेश की हमें बहुत ज्यादा आवश्यकता थी और हमने डब्ल्यूटीओ के दबाव में आकर उदारता की सीढ़ी को अपनाया यानी हमें अपने एफडीआई के नियमों में बहुत बड़ा बदलाव करना पड़ा।और इसका सबसे ज्यादा लाभ उद्योग और सेवा क्षेत्र को मिला लेकिन कृषि क्षेत्र को  इससे सबसे बड़ा आघात लगा।

1990-9134.0
2000-200124.7
2006-0719.55

और अब 2020 आते-आते विकास दर मे कृषि क्षेत्र की भागीदारी केवल 15 % के आसपास  लटक कर रह गई है ।भले ही इंडिया कृषि क्षेत्र पर आधारित ना हो लेकिन भारत की ज्यादातर जनसंख्या रोजगार संसाधन, कृषि पर आधारित है।देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद में भारतीय ग्रामीण प्रति आस्था की हिस्सेदारी 48 फीसद है लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था देश की 70% आबादी की पालनहार है तभी तमाम अर्थशास्त्री कृषि में लगी बड़ी और गैरजरूरी आबादी को दूसरे क्षेत्रों से जोड़ने की बात करते हैं। यदि अर्थशास्त्री की इस बात को मान भी लिया जाए

तो क्या हम कृषि क्षेत्र मे बेहतर अवसर प्राप्त कर पायेंगे । प्रच्छन्न बेरोजगारी कृषि क्षेत्र मे बहुत व्यापक हो चुकी है । जहां दो व्यक्ति किसी काम को निपटा सकते हैं। आज वहां परिवार लगभग सभी सदस्य शामिल होते हैं।सबसे अहम बात है क्या भारत का युवा आज  कृषि क्षेत्र को भविष्य मे लेकर अपेक्षित है?

 आज फार्मिंग से संबंधित ऐसे 80-90% युवा हैं जो एग्रीकल्चर विषय से संबंधित कोर्स कर रहे हैं। इसके बावजूद वर्तमान मे लगभग 0.4 मिलियन छात्र एग्रीकल्चर से विश्वविद्यालय मे अध्ययनरत हैं।लेकिन मुश्किल से 0.1 मिलियन छात्र ही स्नातक हैं। उनमे से ज्यादातर लगभग 70 से 80%  बैकिंग क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।महात्मा गाँधी अपने पत्र “हिन्द स्वराज ” मे लिखते हैं – 

“भारत का शिक्षित युवा भविष्य मे कृषि क्षेत्र मे भविष्य बनाना नही चाहता। यदि कोई युवा अच्छा पढ़ा-लिखा है तो निश्चित रूप से वो शहर मे रोजगार के अवसर तलाशेगा । अतः हमारी शिक्षा तब तक व्यर्थ है जब तक हम स्वरोजगार के अवसर न ढूंढ पाए।”

आज उसी आत्मनिर्भरता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेे दोहराया है । जिसकी शुरुआत कृषि , एमएसएमई, मत्स्य उत्पादन से होती है।इसी क्षेत्र में लगभग कुल आबादी की 60% जनसंख्या कार्यरत है।

  • दूसरी और बात करें तो अनौपचारिक क्षेत्र में लोगों की 93 पर्सेंट से ज्यादा भागीदारी है लेकिन अशिक्षा, कुशलता और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसी भी सरकार यह प्रशासन की नहीं होती।
  • वही हमारे पास 46.5 करोड़ लोगों का कार्य बल है इसमें से लगभग 41.5 करोड़ व्यक्ति अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं जहां पर कोई सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध नहीं है।
  • वर्तमान में 44 केंद्रीय श्रम कानून हैं और 150 राज्य श्रम कानून हैं लेकिन वर्तमान की मांग है कि हम इसमें आवश्यक सुधार करें जिससे एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा मिल सके क्योंकि भारत में केयर रेटिंग के मुताबिक एमएसएमई सेक्टर 30 पर्सेंट से ज्यादा योगदान करता है और यदि माल निर्यात के मामले मे बात करें तो उसकी भागीदारी 48 परसेंट है वही लगभग 11 करोड कार्यबल इसमें शामिल है।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी के अनुसार आज भारत में 24 परसेंट से अधिक बेरोजगारी दर हो चुकी है यानी हर चौथा व्यक्ति यहां बेरोजगार है इसलिए श्रम सुधारों की मांग बहुत लंबे समय से उठती रही है और अब समय आ चुका है जिसमें हम बिल्कुल भी ढील नहीं दे सकते।
भारत में विभिन्न क्षेत्रों में कई समितियाँ और आयोग बने हैं । इन समितियों और आयोगों की सिफारिशों के आधार पर हमारे देश में कई सुधार हुए हैं।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय । कृषि और सहकारिता और किसान कल्याण विभाग देश में प्रमाणित बीजों का उत्पादन और उपलब्धता; प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना (पीएमकेएसवाई) का कार्यान्वयन – एक समीक्षा; देश में कृषि साख प्रणाली का कार्य; पादप संरक्षण निदेशालय, संगरोध और भंडारण – अपरूप समीक्षा; प्रशिक्षण, विस्तार और प्रयोग के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी के बहुआयामी योगदान कृषि ।

 देश के व्यापक विकास में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) की भूमिका – एक मूल्यांकन; प्रधानमंत्री आवास बीमा योजना – एक मूल्यांकन; उत्पादन और उपलब्धता देश में तेल सीड्स के दालों का; भारत में सहकारी विपणन का कार्य; एक विश्लेषण; राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड -पूर्वांस की समीक्षा; राष्ट्रीय बांस मिशन – एक समीक्षा; और भारत में जैविक खेती के लिए समाधान – नीति और योजनाओं की समीक्षा। कृषि अनुसंधान और शिक्षा के शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर, राजस्थान केंद्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, पोर्ट ब्लेयर, अंडमान द्वीप समूह – एक प्रदर्शन की समीक्षा;  तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा – एक प्रदर्शन की समीक्षा; चावल के उच्च उपज वाली किस्मों के विकास में आईसीएआर संस्थानों का योगदान – एक प्रदर्शन की समीक्षा। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय । 


पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन की सीडिपार्टमेंट, राष्ट्रीय डेयरीड्यूप्लमेंट बोर्ड की सुरक्षा और विकास के लिए स्वदेशी मवेशी नस्लों की भूमिका; देश में पशु चिकित्सा सेवाओं और पशु टीकों की उपलब्धता; डेयरी क्षेत्र में दूध और उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली की गुणवत्ता सुनिश्चित करना। और पशुधन बीमा योजनाओं का मूल्यांकन। मत्स्य विभाग मछुआरों के कल्याण पर राष्ट्रीय योजना का कार्यान्वयन – एक मूल्यांकन; शोषण से गहरे समुद्र में मछली पालन; देश में मछली पालन क्षेत्र में बीमा के लिए नीतियां-एक समीक्षा और मत्स्यपालन क्षेत्र की तैनाती उत्पादन और राजस्व क्षमता। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग अनुसंधान और विकास पहल और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उपलब्धियां मंत्रालय। खाद्य प्रसंस्करण संरक्षण क्षमता के निर्माण / विस्तार के लिए रसायन ।


बीते कुछ दिनों पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “21वीं सदी को भारत की सदी” बताया और उसके बाद 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज में किसानों के लिए और मध्यम वर्ग को सक्षम बनाने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं वह सराहनीय है लेकिन पर्याप्त नहीं। वित्त मंत्री सीतारमण ने भी किसानों के लिए अलग से पैकेज बनाने की बात की है जो 40 हजार करोड़ रुपए का होगा ।वैश्वीकरण के इस दौर में यदि हम मजबूती से टिके रहना चाहते हैं तब यह आवश्यक है कि हम अपने प्राथमिक क्षेत्र में कृषि क्षेत्र को बहुत ज्यादा बढ़ावा दें। तभी यह संभव हो पाएगा।